नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुनवाई की। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाबी हलफनामे पर अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर को होगी।
यह मामला चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर उठे सवालों से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ अहम फैसले दूसरे चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। हा
अदालत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हमें सब पता है। हम इसकी जांच करेंगे।” अदालत का रुख इस बात की ओर संकेत करता है कि वह आरोपों पर आगे बढ़ने से पहले संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड देखना चाहती है।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या दलील दी?
निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा कि SIR से संबंधित तीन आदेश—24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026—आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से जारी किए गए थे। आयोग ने इस दावे को भी खारिज किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले निर्णय लिए।
आयोग का कहना है कि फाइलों पर अधिकारियों या आयुक्तों की टिप्पणियों, सवालों और सुझावों को अपने आप आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। उसने फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोप से भी इनकार किया। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। आयोग के अनुसार, SIR के दौरान मांगा गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र फॉर्म-6 से अलग है।
याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां क्या हैं?
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले दूसरे चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद आगे बढ़ाए गए। याचिकाकर्ताओं ने आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड और फाइलों की टिप्पणियों की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए गए थे या नहीं।
इन याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका और आयोग के सामूहिक निर्णय लेने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में आरोपों को गलत बताया है। फिलहाल अदालत ने इन दावों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आयोग के हलफनामे का जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग को भी अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है।
आगे की सुनवाई में अदालत के सामने दोनों पक्षों की दलीलें और संबंधित रिकॉर्ड होंगे। यह तय करना अदालत का काम होगा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में किसी नियम या कानूनी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है या नहीं।