Close Menu
The Mediawala Express
  • Home
  • Political
  • Country/State
  • Bihar/Jharkhand
  • World
  • Religion/Culture
  • Technology
  • Trending
  • Entertainment

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

झारखंड की ग्रामीण व्यवस्था को 5 साल में मिलेंगे ₹14,231 करोड़, पानी और स्वच्छता पर रहेगा जोर

November 4, 2026

हजारीबाग में NIA की 7 घंटे तक चली तलाशी, ट्रांसपोर्टरों के घर से मोबाइल और मशीन ले गई टीम

November 4, 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड के मां-बेटे को दिल्ली बुलाया, वर्षों पुराना रिश्ता फिर चर्चा में

November 4, 2026
Facebook X (Twitter) LinkedIn YouTube
Facebook X (Twitter) LinkedIn YouTube WhatsApp
The Mediawala Express
Subscribe Login
  • Home
  • Political
  • Country/State
  • Bihar/Jharkhand
  • World
  • Religion/Culture
  • Technology
  • Trending
  • Entertainment
The Mediawala Express
Home » GST लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बंद किया 27 साल पुराना टैक्स विवाद? समझें 1974 के फैसले का महत्व
देश/राज्य

GST लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बंद किया 27 साल पुराना टैक्स विवाद? समझें 1974 के फैसले का महत्व

अतिरिक्त सेल्स टैक्स पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें राज्यों की टैक्स लगाने की शक्ति का पूरा मामला
Priyanshu Jha By Priyanshu JhaNovember 4, 2026No Comments5 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp VKontakte Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की ओर से अतिरिक्त बिक्री कर (Additional Sales Tax) या मौजूदा सेल्स टैक्स के आधार पर सरचार्ज लगाने से जुड़े करीब 27 साल पुराने कानूनी विवाद का निपटारा कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि 1974 में एस. कोदार बनाम केरल राज्य मामले में दिया गया फैसला अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है। हालांकि, अदालत ने कहा कि इस विषय पर नए सिरे से विचार करने के लिए उसके सामने भेजा गया सवाल जीएसटी लागू होने और संबंधित कानूनों में बदलाव के बाद अब व्यावहारिक महत्व नहीं रखता।

इस फैसले का महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें राज्यों की कर लगाने की विधायी शक्ति और केंद्र तथा राज्यों के बीच कराधिकार के संवैधानिक बंटवारे से जुड़े पुराने सवाल पर स्थिति स्पष्ट की गई है। अदालत ने 1974 के फैसले को दोबारा खारिज या निरस्त नहीं किया, बल्कि कहा कि उसमें तय कानूनी सिद्धांत अब भी लागू हैं।

सात जजों की संविधान पीठ ने क्या फैसला सुनाया?

बुधवार, 4 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया। पीठ में न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन, एस.वी.एन. भट्टी, जॉयमाल्य बागची, एन.वी. अंजारिया, अरुण पल्ली और वी. मोहना भी शामिल थे।

अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या राज्य सरकारें पहले से लगाए गए बिक्री या खरीद कर के आधार पर अतिरिक्त कर, सरचार्ज या अन्य अधिभार लगा सकती हैं। पीठ ने कहा कि जिस कानूनी संदर्भ पर विचार मांगा गया था, उससे जुड़े पुराने कानूनों में बदलाव हो चुका है और जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद यह विवाद भविष्य के लिए पहले जैसा प्रासंगिक नहीं रहा।

न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने भी अलग से सहमति वाला फैसला लिखा।

1974 के एस. कोदार मामले में क्या तय हुआ था?

इस विवाद की जड़ 1974 के एस. कोदार बनाम केरल राज्य मामले में है। उस समय सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने अतिरिक्त बिक्री कर लगाने की वैधता को स्वीकार किया था।

अदालत ने माना था कि यदि अतिरिक्त कर की गणना पहले से देय बिक्री कर के प्रतिशत के आधार पर की जाती है, तो उसे बिक्री कर की दर में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है। इसे डीलर की आय पर लगाया गया अलग कर नहीं माना जाएगा। इस तरह का कर वस्तुओं की बिक्री या खरीद पर कर लगाने की राज्य की संवैधानिक शक्ति के दायरे में आ सकता है।

यह अधिकार उस समय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 54 से जुड़ा था, जिसमें राज्यों को वस्तुओं की बिक्री या खरीद पर कर लगाने की शक्ति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 4 नवंबर के फैसले में स्पष्ट किया कि 1974 के निर्णय में स्थापित यह कानूनी सिद्धांत अब भी प्रभावी है।

मामला 27 साल तक सुप्रीम कोर्ट में क्यों लंबित रहा?

यह विवाद अर्जुन फ्लोर मिल्स बनाम ओडिशा राज्य मामले से जुड़ा था। इसमें ओडिशा सेल्स टैक्स एक्ट, 1947 की धारा 5A को चुनौती दी गई थी। इस प्रावधान के तहत कारोबारियों पर उनके सालाना टर्नओवर के आधार पर अतिरिक्त कर लगाने का प्रावधान था।

प्रावधान के अनुसार, 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों पर 10 प्रतिशत और एक करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वालों पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया जाना था।

विवाद यह था कि क्या राज्य सरकार को बिक्री कर के आधार पर इस तरह का अतिरिक्त कर लगाने का अधिकार है या यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले आयकर जैसा कर बन जाता है।

इसी कानूनी सवाल पर पहले के कुछ सुप्रीम कोर्ट फैसलों की व्याख्या को लेकर मतभेद सामने आए। इसके बाद 1999 में इस मामले को सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजा गया।

जीएसटी लागू होने से विवाद का व्यावहारिक महत्व क्यों घटा?

भारत में जुलाई 2017 से वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू है। इस व्यवस्था ने केंद्र और राज्यों के अप्रत्यक्ष कर ढांचे में बड़ा बदलाव किया। पुराने बिक्री कर से जुड़े कई कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों की जगह नई व्यवस्था ने ले ली।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए कहा कि जिस कानूनी सवाल पर बड़ी पीठ से राय मांगी गई थी, वह अब पहले जैसा व्यावहारिक महत्व नहीं रखता। इसलिए इस पर अलग से नया निर्णय देने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने राज्यों के हर तरह के अतिरिक्त कर या सरचार्ज को बिना किसी शर्त के वैध घोषित कर दिया है। फैसला विशेष रूप से पुराने बिक्री कर कानूनों और 1974 के एस. कोदार निर्णय से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों पर आधारित है।

पंजाब से जुड़े कुछ कानूनी सवाल अभी खुले हैं

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पंजाब से जुड़े कुछ अलग मुद्दों पर अंतिम राय नहीं दी। इनमें पंजाब जनरल सेल्स टैक्स एक्ट के तहत कुछ औद्योगिक इकाइयों पर सरचार्ज लगाने की वैधता और पंजाब सोशल सिक्योरिटी एक्ट के तहत एकत्रित उपकर की राशि को सीधे संबंधित फंड में जमा करने का सवाल शामिल है।

अदालत ने इन मुद्दों सहित संबंधित मामलों के अन्य दावों को भी खुला रखा है। इन पर आगे उचित पीठ सुनवाई कर सकती है। इसलिए इस फैसले को सभी राज्यों के हर प्रकार के अतिरिक्त कर विवादों का अंतिम समाधान मानना सही नहीं होगा।

अतिरिक्त सेल्स टैक्स एस कोदार मामला जीएसटी बिक्री कर संविधान पीठ सीजेआई सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email
Previous Articleअमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी वापसी, संसद के दोनों सदनों पर किया कब्जा
Next Article राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड के मां-बेटे को दिल्ली बुलाया, वर्षों पुराना रिश्ता फिर चर्चा में
Priyanshu Jha
  • Website

Related Posts

दिल्ली में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बोनस की समय-सीमा तय, 30 नवंबर तक भुगतान करना होगा अनिवार्य

November 3, 2026

उत्तराखंड में चुनावी तैयारियों को लेकर कांग्रेस सक्रिय, प्रियंका गांधी के साथ वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक

November 3, 2026

सेंट्रल विस्टा परियोजना के रास्ते में कदीमी मस्जिद, केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट में रखा हटाने का पक्ष

November 3, 2026

असम के कामरूप में मत्स्य पालन सुविधाओं का निरीक्षण, उत्पादन और आजीविका बढ़ाने पर जोर

November 2, 2026
Leave A Reply Cancel Reply

Ad
Ad
Our Picks
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • YouTube
  • WhatsApp
Don't Miss
बिहार/झारखंड

झारखंड की ग्रामीण व्यवस्था को 5 साल में मिलेंगे ₹14,231 करोड़, पानी और स्वच्छता पर रहेगा जोर

By Priyanshu JhaNovember 4, 20260

रांची: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पेयजल और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने…

हजारीबाग में NIA की 7 घंटे तक चली तलाशी, ट्रांसपोर्टरों के घर से मोबाइल और मशीन ले गई टीम

November 4, 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड के मां-बेटे को दिल्ली बुलाया, वर्षों पुराना रिश्ता फिर चर्चा में

November 4, 2026

GST लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बंद किया 27 साल पुराना टैक्स विवाद? समझें 1974 के फैसले का महत्व

November 4, 2026

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

About Us
About Us

मीडिया वाला एक्सप्रेस एक ऐसा डिजिटल समाचार का मंच है, जहां आपको सीधे सच्ची खबर मिलती है। दिन प्रतिदिन देश विदेश व प्रदेश में क्या घटनाएं हो रही है, वह सारा समाचार आपके पास पहुंचाने की जिम्मेवारी हमारी है।
We're accepting new partnerships right now.

Head Office: The Mediawala Express, Second Floor, Above DCB bank, Vikas Chowk, Near Vikas Vidyalaya, Neori, Ranchi, Jharkhand, 835217
Email Us: digital@themediawalaexpress.live
Contact: +91 94717 10036

Our Picks

झारखंड की ग्रामीण व्यवस्था को 5 साल में मिलेंगे ₹14,231 करोड़, पानी और स्वच्छता पर रहेगा जोर

November 4, 2026

हजारीबाग में NIA की 7 घंटे तक चली तलाशी, ट्रांसपोर्टरों के घर से मोबाइल और मशीन ले गई टीम

November 4, 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड के मां-बेटे को दिल्ली बुलाया, वर्षों पुराना रिश्ता फिर चर्चा में

November 4, 2026
Quick Link
  • Home
  • Political
  • Country/State
  • Bihar/Jharkhand
  • World
  • Religion/Culture
  • Technology
  • Trending
  • Entertainment
The Mediawala Express
Facebook X (Twitter) LinkedIn YouTube WhatsApp
© 2026 TheMediaWala. Designed by Protonshub Technologies.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Sign In or Register

Welcome Back!

Login to your account below.

Lost password?