नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार और मस्जिद की देखरेख करने वाली कमेटी के बीच कानूनी विवाद दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने अदालत में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत प्रस्तावित नए सरकारी भवनों के निर्माण के लिए मस्जिद को हटाना आवश्यक है।
भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के माध्यम से 27 अक्टूबर को दाखिल रिपोर्ट में केंद्र ने दलील दी है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और 8 नवंबर 1940 के समझौते के तहत इसकी देखरेख करने वाली कमेटी को केवल सीमित उद्देश्य से परिसर का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। सरकार के मुताबिक, इस समझौते से कमेटी को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला।
केंद्र ने सरकारी जमीन और पुनर्विकास परियोजना का दिया हवाला
केंद्र की दलील है कि कृषि भवन और आसपास का केंद्रीय सचिवालय परिसर सरकारी प्रशासनिक कार्यों के लिए निर्धारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) के भवन 4 और 5 का निर्माण प्रस्तावित है। मस्जिद उसी परियोजना स्थल पर स्थित है, इसलिए निर्माण कार्य आगे बढ़ाने के लिए उसे हटाना जरूरी है।
सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि किसी केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर में स्थायी धार्मिक ढांचे को बनाए रखना सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं है। केंद्र के अनुसार, जमीन का स्वामित्व भारत सरकार के पास है और मस्जिद कमेटी इस परिसर में अलग से धार्मिक स्थल के लिए जगह देने की मांग नहीं कर सकती।
मस्जिद कमेटी ने संरक्षण या वैकल्पिक प्रार्थना स्थल मांगा
मस्जिद की देखरेख करने वाली कमेटी ने अदालत में याचिका दायर कर कदीमी मस्जिद को हटाने या उसके ढांचे में बदलाव करने से रोकने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मस्जिद का इस्तेमाल कई दशकों से कृषि भवन और आसपास के सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी नमाज के लिए करते रहे हैं।
कमेटी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि पुनर्विकास परियोजना में संभव हो तो मस्जिद को मौजूदा स्थान पर बनाए रखा जाए। यदि ऐसा करना संभव नहीं हो, तो पास में उचित और पर्याप्त वैकल्पिक प्रार्थना स्थल उपलब्ध कराया जाए। याचिका में मस्जिद को वक्फ संपत्ति के रूप में 1970 में अधिसूचित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
हाई कोर्ट ने केंद्र से धार्मिक स्थलों के नियमों पर मांगी स्पष्टता
2 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकारी परिसरों में धार्मिक स्थलों या प्रार्थना की जगह पर रोक लगाने वाले कोई स्पष्ट नियम हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि यदि ऐसे परिसरों में धार्मिक स्थल की अनुमति नहीं है, तो वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के संबंध में क्या व्यवस्था है।
अदालत ने मस्जिद कमेटी को केंद्र की स्टेटस रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
फिलहाल मस्जिद हटाने पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं
इस मामले में केंद्र सरकार ने मस्जिद को हटाने की आवश्यकता बताते हुए अपना पक्ष अदालत के सामने रखा है। हालांकि, यह अभी अदालत का अंतिम आदेश नहीं है। मस्जिद कमेटी की आपत्तियों और केंद्र की दलीलों पर सुनवाई के बाद ही हाई कोर्ट आगे का निर्णय करेगा।
इसलिए फिलहाल कदीमी मस्जिद के भविष्य को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण 23 नवंबर की सुनवाई होगी।