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Home » झारखंड की ग्रामीण व्यवस्था को 5 साल में मिलेंगे ₹14,231 करोड़, पानी और स्वच्छता पर रहेगा जोर
बिहार/झारखंड

झारखंड की ग्रामीण व्यवस्था को 5 साल में मिलेंगे ₹14,231 करोड़, पानी और स्वच्छता पर रहेगा जोर

16वें वित्त आयोग के अनुदान से झारखंड में सुधरेगी ग्रामीण जल व्यवस्था, पंचायतों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
Priyanshu Jha By Priyanshu JhaNovember 4, 2026No Comments4 Mins Read
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रांची: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पेयजल और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे। 16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच राज्य के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए ₹14,231 करोड़ के अनुदान की सिफारिश की है। इस राशि के प्रभावी इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार ने ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, रखरखाव और स्वच्छता व्यवस्था में अधिक जिम्मेदारी देने पर जोर दिया है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में केवल नई जलापूर्ति संरचनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। पहले से मौजूद योजनाओं को चालू रखना, पानी की गुणवत्ता की निगरानी करना और नियमित मरम्मत की व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 और 16वें वित्त आयोग के अनुदान के बीच बेहतर तालमेल बनाने की पहल की जा रही है।

झारखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए ₹14,231 करोड़ की सिफारिश

16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, 2026-27 से 2030-31 की अवधि में झारखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए ₹14,231 करोड़ का अनुदान प्रस्तावित है। यह राशि ग्रामीण स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने और गांवों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए है।

आयोग के राष्ट्रीय स्तर के अनुदान ढांचे में बुनियादी अनुदान का आधा हिस्सा जल प्रबंधन, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे निर्धारित कार्यों के लिए रखा गया है। इसे टाइड ग्रांट कहा जाता है। बाकी अनुदान का उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार निर्धारित नियमों के तहत किया जा सकता है।

इसलिए ₹14,231 करोड़ को पूरी तरह जलापूर्ति और स्वच्छता के लिए निर्धारित राशि नहीं समझना चाहिए। यह झारखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए कुल अनुशंसित अनुदान है।

जल जीवन मिशन 2.0 के साथ बेहतर तालमेल बनाने की तैयारी

केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने राज्यों के साथ जल जीवन मिशन 2.0 और 16वें वित्त आयोग के अनुदान के बेहतर उपयोग पर चर्चा की है। विभाग की 22 अक्टूबर 2026 की जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य ग्रामीण जलापूर्ति सेवाओं को लंबे समय तक सुचारु बनाए रखना, जलस्रोतों की स्थिरता बढ़ाना और पंचायतों के नेतृत्व में योजनाओं का संचालन सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय का जोर इस बात पर है कि वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान का उपयोग जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और स्थानीय संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने में किया जाए।

ग्राम पंचायतों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए ग्राम पंचायतों की भूमिका अहम मानी जा रही है। केंद्र ने पंचायतों को हर साल संचालन और रखरखाव की योजना तैयार करने, स्थानीय संसाधनों की व्यवस्था करने और जलापूर्ति सेवाओं की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाने की सलाह दी है।

पंचायतों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जल जीवन मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत बनाई गई जलापूर्ति संरचनाओं का सही तरीके से उपयोग हो। इसके लिए संबंधित विभागों और स्थानीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।

नई योजनाओं से पहले पुरानी व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर

केंद्र की सलाह है कि जहां पहले से नल-जल योजनाएं और दूसरी जलापूर्ति परिसंपत्तियां मौजूद हैं, वहां उनकी मरम्मत और नियमित देखरेख को प्राथमिकता दी जाए। पानी की पाइपलाइन में रिसाव, पंपों की मरम्मत, क्लोरीनेशन, बिजली खर्च और जल गुणवत्ता की जांच जैसी जरूरतों के लिए पहले से वित्तीय योजना बनाई जानी चाहिए।

इसके साथ ही गांवों में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने में भी ग्राम पंचायतों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर है। इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता की सुविधाएं केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि लंबे समय तक लोगों को लाभ देती रहें।

क्या है इसका महत्व? 16वें वित्त आयोग के अनुदान और जल जीवन मिशन 2.0 के बीच तालमेल से झारखंड की पंचायतों को ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए बेहतर वित्तीय आधार मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि राशि समय पर जारी हो और पंचायतें योजनाओं का प्रभावी प्रबंधन कर पाएं।

16वां वित्त आयोग JJM 2.0 ग्राम पंचायत ग्रामीण विकास जल जीवन मिशन झारखंड पेयजल रांची स्वच्छता
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