रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने 10 और आरोपितों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा में अनुचित तरीके से सफलता दिलाने के लिए बिचौलियों, एजेंटों और परीक्षा से जुड़े लोगों का नेटवर्क सक्रिय था। इस मामले में अब तक 34 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कुल 22 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए जा चुके हैं।
रांची स्थित CID की विशेष अदालत में दाखिल आरोप पत्र में OMR शीट में कथित हेराफेरी, अभ्यर्थियों से पैसे लेने और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने से जुड़े आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसी ने डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से संबंधित साक्ष्य भी अदालत के समक्ष रखे हैं। ये सभी आरोप फिलहाल न्यायिक जांच के अधीन हैं।
OMR शीट और उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी का आरोप
CID की जांच में परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को प्रभावित करने की कथित साजिश सामने आई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों की OMR शीट में बाद में बदलाव कर उनके अंक बढ़ाए गए। इसके अलावा, स्ट्रांग रूम से उत्तर पुस्तिकाएं बाहर निकालकर उन पर लिखवाने की बात भी जांच में सामने आई है।
एजेंसी के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में परीक्षा माफिया, बिचौलिए, एजेंट और अनुचित तरीके से सफल हुए अभ्यर्थी शामिल थे। आरोप पत्र में परीक्षा केंद्रों, मूल्यांकन प्रक्रिया और गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच का कथित तौर पर दुरुपयोग किए जाने का भी उल्लेख है।
11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये लेने का आरोप
चार्जशीट में बुद्धेश्वर भगत की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। CID के मुताबिक, वह कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के संपर्क में था और उसने 11 अभ्यर्थियों से परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर कुल 1.10 करोड़ रुपये वसूले थे।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज और उनसे ली गई रकम को सिंडिकेट के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने में भी उसकी भूमिका थी। मामले की जांच में अभ्यर्थियों से नकद के अलावा बैंकिंग माध्यमों से संदिग्ध लेन-देन की बात भी सामने आई है।
JPSC के तत्कालीन सदस्य की टीम से जुड़े कर्मचारी पर भी आरोप
चार्जशीट में ब्रज कुमार राम का नाम भी शामिल है। वह JPSC की तत्कालीन सदस्य अजिता भट्टाचार्य का निजी सहायक बताया गया है। CID के अनुसार, उसने कथित तौर पर परीक्षा में सेटिंग कराने वाले नेटवर्क और आयोग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क सूत्र की भूमिका निभाई।
उस पर 11वीं से 13वीं JPSC के साक्षात्कार में एक अभ्यर्थी के अंक बढ़वाकर DSP पद पर चयन कराने के बदले पांच लाख रुपये लेने का आरोप भी है। यह आरोप भी जांच एजेंसी की ओर से प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है और इसका अंतिम निर्धारण अदालत में होना है।
पूरक आरोप पत्र में इन 10 लोगों के नाम
CID की ओर से दाखिल पूरक आरोप पत्र में जिन 10 लोगों को आरोपित बनाया गया है, उनके नाम हैं:
- बुद्धेश्वर भगत
- रमेश कुमार
- उमेश कुमार
- ब्रज कुमार राम
- अरुण कुमार
- उमाकांत उरांव
- मनोज कुमार
- धर्मेंद्र कुमार
- रक्षक सिंह
- रोशन केरकेट्टा
जांच एजेंसी ने इन लोगों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने का आरोप लगाया है। इनमें कुछ पर अभ्यर्थियों से संपर्क करने और रकम जुटाने, कुछ पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने और कुछ पर OMR शीट में कथित हेराफेरी में शामिल होने के आरोप हैं।
अब तक 34 गिरफ्तार, 22 के खिलाफ आरोप पत्र
इस मामले में CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत अब तक 34 लोगों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले 12 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। अब 10 अन्य लोगों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल होने के बाद आरोप पत्र का सामना कर रहे लोगों की संख्या 22 हो गई है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और चयन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, आरोप पत्र में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।