गिरिडीह: रोजगार की तलाश में झारखंड से पश्चिम बंगाल गए एक मजदूर की औद्योगिक हादसे में जान चली गई। गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड के मनरो गांव निवासी हेमंत कुमार दास की मौत रानीगंज स्थित श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड के प्लांट में काम करने के दौरान हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 3 नवंबर की रात करीब 11 बजे वह ब्लास्ट फर्नेस में गिर गए थे। हादसे में गंभीर रूप से झुलसने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हेमंत की मौत की खबर गांव पहुंचने के बाद परिवार और आसपास के इलाके में शोक का माहौल है। वह परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरे राज्य में काम कर रहे थे। उनके निधन से परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा होने की आशंका है।
मनरो गांव के रहने वाले थे हेमंत कुमार दास
मृतक हेमंत कुमार दास गिरिडीह के पीरटांड़ प्रखंड की हरलाडी पंचायत के मनरो गांव के निवासी थे। वह काम के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के रानीगंज गए थे और श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड के एक औद्योगिक प्लांट में मजदूरी करते थे।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 3 नवंबर की रात ड्यूटी के दौरान उनके साथ यह हादसा हुआ। बताया गया है कि वह प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस में गिर गए और गंभीर रूप से झुलसने के कारण उनकी जान चली गई। हालांकि, दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
जनता जागरूकता संघ ने मुआवजे की मांग उठाई
घटना के बाद जनता जागरूकता संघ ने पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है। संघ का कहना है कि हेमंत परिवार के कमाने वाले सदस्य थे। ऐसे में उनकी मौत से परिवार को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
संघ ने कंपनी प्रबंधन से मानवीय आधार पर परिवार को उचित मुआवजा देने की अपील की है। साथ ही, हादसे की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन-से कारण जिम्मेदार थे।
औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर जरूरी सावधानियों के पालन का मुद्दा सामने ला दिया है। ब्लास्ट फर्नेस जैसे जोखिम वाले स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और आपातकालीन व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।
फिलहाल हादसे के कारणों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर आधिकारिक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है। कंपनी प्रबंधन की ओर से मुआवजे या घटना पर कोई आधिकारिक बयान भी उपलब्ध नहीं है। अब पीड़ित परिवार को सहायता और दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।