झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा प्रखंड के एक छोटे से गांव की कलावती मुंडा और उनके बेटे दिलीप के लिए दीपावली इस बार खास यादों के साथ आई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के निमंत्रण पर दोनों दिल्ली पहुंचे और राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति भवन की ओर से उन्हें त्योहार के उपहार के रूप में कपड़े और आर्थिक सहायता दी गई। मां-बेटे को दिल्ली के कुछ प्रमुख स्थानों का भ्रमण भी कराया गया।
कलावती और दिलीप का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से जुड़ाव नया नहीं है। जब मुर्मु झारखंड की राज्यपाल थीं, तब उन्होंने इस परिवार की मुश्किलों के बारे में जानकारी मिलने के बाद मदद की पहल की थी। अब राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनके साथ यह संपर्क बना हुआ है। इस मुलाकात ने करीब नौ साल पुराने इस रिश्ते को फिर चर्चा में ला दिया है।
कौन हैं कलावती मुंडा और उनके बेटे दिलीप?
कलावती मुंडा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा प्रखंड के जियान गांव की रहने वाली हैं। वह दिव्यांग हैं और उनके बेटे का नाम दिलीप मुंडा है। परिवार ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। वर्ष 2015 में द्रौपदी मुर्मु के झारखंड की राज्यपाल रहने के दौरान इस परिवार की स्थिति सामने आई थी। इसके बाद उन्होंने कलावती और उनके बेटे को राजभवन बुलाकर मदद की पहल की थी।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उस समय दिलीप की पढ़ाई और देखभाल में सहयोग की व्यवस्था की गई थी। राष्ट्रपति से इस परिवार का जुड़ाव इसी मदद के बाद बना रहा। हालांकि, इसे कानूनी रूप से गोद लेने की घटना बताने की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती। बीडीओ के साथ दिल्ली पहुंचे मां-बेटे
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, गुड़ाबांदा के प्रखंड विकास पदाधिकारी डांगुर कोड़ाह मां-बेटे को लेकर दिल्ली गए थे। दोनों घाटशिला से पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के सेकंड एसी कोच में यात्रा कर राजधानी पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद उनके आवागमन के लिए सरकारी वाहन की व्यवस्था की गई।
उन्हें राजभवन परिसर ले जाया गया और वहां का भ्रमण कराया गया। इस यात्रा का उद्देश्य राष्ट्रपति के निमंत्रण पर उनसे मुलाकात करना था।
राष्ट्रपति भवन में हुई मुलाकात, मिले दीपावली के उपहार
दिल्ली प्रवास के दौरान कलावती और दिलीप ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। राष्ट्रपति ने दोनों का हालचाल जाना। इस अवसर पर उन्हें दीपावली के उपहार के तौर पर कपड़े और आर्थिक सहायता दी गई।
मुलाकात के बाद मां-बेटे को सरकारी वाहन से दिल्ली के प्रमुख स्थानों का भ्रमण कराया गया। गांव से देश की राजधानी तक की यह यात्रा उनके लिए एक खास अनुभव रही।
राज्यपाल रहते शुरू हुआ था मदद का सिलसिला
द्रौपदी मुर्मु वर्ष 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल रहीं। इस दौरान उन्होंने कलावती और उनके बेटे की स्थिति के बारे में जानकारी मिलने पर सहायता की पहल की थी। बाद में भी इस परिवार के साथ उनका संपर्क बना रहा।
राष्ट्रपति भवन से मिला ताजा निमंत्रण इसी पुराने जुड़ाव की एक और कड़ी है। इस मुलाकात ने दिखाया कि सार्वजनिक पद की जिम्मेदारियों के बीच भी पुराने संपर्क और मानवीय रिश्ते किस तरह कायम रह सकते हैं।