The Mediawala Express | नई दिल्ली/रांची | जून 2025
झारखंड आंदोलन के प्रणेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संरक्षक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तबीयत इन दिनों ठीक नहीं है। उन्हें दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है। जैसे ही यह खबर सामने आई, पूरे राज्य और देशभर से उनके लिए दुआओं का सिलसिला शुरू हो गया।
अस्पताल में भर्ती, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, 81 वर्षीय शिबू सोरेन को किडनी संक्रमण और श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्या ब्रॉन्काइटिस के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआत में उन्हें हल्का पैरालिटिक अटैक भी आया था। फिलहाल डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम उनकी निगरानी कर रही है और स्थिति स्थिर बताई गई है।
परिवार और सरकार की सतर्कता
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो उनके पुत्र भी हैं, इलाज के दौरान परिवार के साथ दिल्ली में मौजूद हैं। साथ ही, झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और मंत्री संजय यादव को विशेष निर्देश पर दिल्ली भेजा है, ताकि अस्पताल से लगातार जानकारी ली जा सके।
राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन भी दिल्ली पहुंचे और अस्पताल में जाकर डॉक्टरों से शिबू सोरेन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने परिवार से मिलकर संवेदना जताई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जताई चिंता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सर गंगा राम अस्पताल पहुंचकर दिशोम गुरु का हालचाल जाना और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। यह मुलाकात संवेदनशीलता और राजनीतिक शिष्टाचार का प्रतीक मानी जा रही है।
झारखंड में चल रही विशेष प्रार्थनाएं
रांची समेत झारखंड के विभिन्न हिस्सों में झामुमो कार्यकर्ता मंदिरों, मस्जिदों, गिरजाघरों और गुरुद्वारों में प्रार्थना कर रहे हैं। रांची के जगन्नाथ मंदिर में कार्यकर्ताओं ने पूजा-अर्चना की। दुमका, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो में भी विशेष यज्ञ, चादरपोशी और संकीर्तन का आयोजन हुआ है।
राजनीतिक गलियारों में चिंता और एकजुटता
झामुमो, कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने शिबू सोरेन के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। नेताओं ने बयान जारी कर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। राजनीतिक मतभेदों से इतर सभी दलों ने उन्हें आदिवासी अस्मिता और संघर्ष की आवाज बताया है।
जनता के बीच गहरी संवेदना
दिशोम गुरु केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड के लिए एक प्रतीक हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर आम जनता में भी गहरी चिंता है। सोशल मीडिया पर हज़ारों लोग उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
निष्कर्ष
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तबीयत भले नाजुक है, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी आज भी लोगों में ऊर्जा और उम्मीद भरती है। झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक चेतना में उनका स्थान हमेशा अद्वितीय रहा है। देशभर से हो रही दुआएं इस बात का संकेत हैं कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक युग पुरुष हैं।