Updated: 19 जुलाई 2025 | मुंबई/गोड्डा
महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों के साथ हो रही कथित मारपीट और भाषाई भेदभाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। इस विवाद में अब झारखंड के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे आमने-सामने आ गए हैं। दोनों नेताओं के तीखे बयानों ने विवाद को और हवा दे दी है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
हाल ही में मुंबई में एक दुकानदार को मराठी में बात नहीं करने पर कथित रूप से पीटा गया था। इस घटना के सामने आने के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदी भाषियों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा था कि अगर इतनी ही हिम्मत है तो उर्दू, तमिल या तेलुगू बोलने वालों पर भी वैसा ही रवैया अपनाएं।
दुबे ने चुनौती देते हुए कहा था कि यदि कोई मुंबई से बिहार या झारखंड आता है, तो “हम पटक-पटक कर जवाब देंगे।”
राज ठाकरे ने दिया समुंदर वाला जवाब
निशिकांत दुबे के तीखे बयान के बाद मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी पलटवार करने में देर नहीं की। उन्होंने मुंबई की एक जनसभा में कहा –
“अगर दुबे मुंबई आए, तो उन्हें समुद्र में डुबो-डुबोकर मारा जाएगा।”
गौर करने वाली बात यह है कि राज ठाकरे ने यह बयान हिंदी भाषा में दिया, जो खुद मनसे की भाषा नीति के खिलाफ जाता है। यही बात निशिकांत दुबे ने जोरदार अंदाज़ में भुनाई।
निशिकांत दुबे का तंज – “राज ठाकरे को हिंदी सिखा दी?”
दुबे ने राज ठाकरे के बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में Twitter) पर शेयर करते हुए तंज कसा –
“मैंने राज ठाकरे को हिंदी सिखा दी?”
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और लोगों ने इसे हिंदी बनाम मराठी राजनीति की नई कड़ी बताया है।
राजनीतिक मायने
- मनसे लंबे समय से मुंबई में मराठी बोलने की अनिवार्यता पर जोर देती रही है।
- दूसरी ओर भाजपा नेता हिंदी भाषी वोट बैंक को साधने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
- यह विवाद अब मराठा अस्मिता बनाम हिंदी आत्मसम्मान की लड़ाई बनता जा रहा है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र में एक बार फिर भाषाई अस्मिता और क्षेत्रीय पहचान का मुद्दा गरमा गया है। हालांकि यह केवल भाषा तक सीमित नहीं है — इसके पीछे राजनीतिक समीकरण और जनाधार को मजबूत करने की होड़ भी छिपी है। अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और कितना गहराता है।