अब खदानों की रहस्यमयी दुनिया को जानिए करीब से: झारखंड में शुरू हुआ भारत का पहला माइनिंग टूरिज्म
रांची – झारखंड ने पर्यटन की दुनिया में एक अनूठी पहल करते हुए देश का पहला माइनिंग टूरिज्म शुरू किया है। खनिज संपदा से भरपूर इस राज्य की सरकार ने अब खदानों के रहस्यमयी और रोमांचकारी पहलुओं को जनता के लिए खोलने का फैसला लिया है। इस नई पहल के अंतर्गत आम लोग, पर्यटक और शैक्षणिक संस्थाएं अब कोयले की खदानों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकेंगे।
राज्य सरकार और CCL के बीच समझौता
इस उद्देश्य को मूर्त रूप देने के लिए राज्य सरकार की ओर से झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDCL) और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के बीच एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किया गया है। इसके तहत सीसीएल की कुछ चयनित खदानों को पर्यटन के लिए खोला जाएगा, जहाँ गाइडेड टूर और सेफ्टी इंतजामों के साथ लोग खनन प्रक्रिया को देख सकेंगे।
खनन को अब मिलेगा सांस्कृतिक और पर्यटन स्वरूप
राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सिर्फ खदानों को दिखाना नहीं बल्कि झारखंड की समृद्ध खनन विरासत को पर्यटन के माध्यम से संरक्षित करना और वैश्विक स्तर पर प्रचारित करना है। यह पहल पर्यटकों के लिए न सिर्फ एक रोमांचक अनुभव होगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि लाएगी।
प्रेरणा बनी बार्सिलोना यात्रा
मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा के दौरान स्पेन के बार्सिलोना स्थित प्राचीन खनन संग्रहालय की यात्रा ने इस योजना की आधारशिला रखी। वहाँ की खनन पर्यटन प्रणाली से प्रेरणा लेकर झारखंड में भी इसी तरह का मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया गया।
शैक्षिक और शोध के लिए भी उपयोगी
इस माइनिंग टूरिज्म परियोजना से न सिर्फ पर्यटन को बल मिलेगा बल्कि भूविज्ञान, पर्यावरण, इंजीनियरिंग और अर्थशास्त्र जैसे विषयों के विद्यार्थियों को भी व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
भविष्य में और खदानों को जोड़ा जाएगा
परियोजना के पहले चरण में कुछ खदानों को खोला जा रहा है, लेकिन योजना है कि आने वाले समय में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और अन्य संस्थाओं के सहयोग से और भी खदानों को माइनिंग टूरिज्म सर्किट में जोड़ा जाएगा।