प्रकाशित: 7 जुलाई 2025 | The Mediawala Express डेस्क
रांची — झारखंड के मेडिकल शिक्षा ढांचे की कमजोरियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के पांच प्रमुख मेडिकल कॉलेजों — जमशेदपुर, धनबाद, दुमका, पलामू और हजारीबाग — में संसाधनों और फैकल्टी की भारी कमी पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने सख्त रुख अपनाया है।
हालांकि फिलहाल इन कॉलेजों को 100-100 MBBS सीटों पर दाखिले की अनुमति दी गई है, लेकिन शर्त साफ है — जुलाई से अक्टूबर 2025 तक सभी कमियों को दूर करना अनिवार्य होगा, वरना कड़ी कार्रवाई तय है।
संसाधनों की सच्चाई: लाइसेंस खत्म, शवों की कमी, MRI तक नहीं
एनएमसी द्वारा की गई जांच में चौंकाने वाली खामियां उजागर हुई हैं:
- जमशेदपुर का ब्लड बैंक 2008 से बिना लाइसेंस के
- दुमका का ब्लड बैंक 2018 से एक्सपायर्ड
- धनबाद व जमशेदपुर में MRI मशीन नहीं
- क्लिनिकल और पैथोलॉजिकल जांच सुविधाओं की भारी कमी
- शवों की कमी से MBBS छात्रों की पढ़ाई बाधित
फैकल्टी के आंकड़े: पूरे विभाग खाली पड़े हैं
- धनबाद के 20 में से 19 विभागों में फैकल्टी की कमी
- दुमका, पलामू, हजारीबाग और जमशेदपुर — सभी विभागों में फैकल्टी की घोर किल्लत
- दुमका में सिर्फ 41 फैकल्टी, जबकि आवश्यकता 150 से अधिक की
- जमशेदपुर और धनबाद में सिर्फ 9-9 प्रोफेसर
क्या होगा अगर समय पर नहीं हुई सुधार?
एनएमसी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अक्टूबर 2025 तक सभी कमियां दूर नहीं की गईं, तो:
- सीटें घटाई जा सकती हैं
- दाखिले पर रोक लग सकती है
- एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है
- MSMER 2023 के तहत कार्रवाई की जाएगी
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