Close Menu
The Mediawala Express
  • Home
  • Political
  • Country/State
  • Bihar/Jharkhand
  • World
  • Religion/Culture
  • Technology
  • Trending
  • Entertainment

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

मुंबई में बड़ा स्कैम: सोने के सिक्कों के नाम पर परिवार से 30 लाख की ठगी,मुंबई पुलिस से कार्रवाई की मांग

August 26, 2025

झारखंड में सड़क निर्माण पर कैग रिपोर्ट का बड़ा खुलासा, अब तक करोड़ों रुपए हुए बर्बाद

August 25, 2025

झारखंड में भी लागू होगा SIR? पूर्व मुख्यमंत्री का दावा, बोले- “फर्जी वोटर्स की होगी पहचान”

August 23, 2025
Facebook X (Twitter) LinkedIn YouTube
Facebook X (Twitter) LinkedIn YouTube
The Mediawala Express
Subscribe Login
  • Home
  • Political
  • Country/State
  • Bihar/Jharkhand
  • World
  • Religion/Culture
  • Technology
  • Trending
  • Entertainment
The Mediawala Express
Home » संवैधानिक मर्यादा बनाम कट्टरपंथी सोच: हफ़ीज़ुल हसन प्रकरण पर मंथन आवश्यक…बाबूलाल मरांडी ने कसा तंज
खेल

संवैधानिक मर्यादा बनाम कट्टरपंथी सोच: हफ़ीज़ुल हसन प्रकरण पर मंथन आवश्यक…बाबूलाल मरांडी ने कसा तंज

हफ़ीज़ुल हसन के बयान ने झारखंड की संवैधानिक व्यवस्था और आदिवासी अस्मिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं
Priyanshu Jha By Priyanshu JhaApril 14, 2025Updated:April 14, 2025No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp VKontakte Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

The Mediawala Express संवाददाता | रांची

झारखंड की सियासत में इन दिनों मंत्री हफ़ीज़ुल हसन के एक बयान को लेकर घमासान मचा हुआ है। उन पर आरोप है कि वे संवैधानिक पद पर रहते हुए निजी धार्मिक विचारों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो न सिर्फ प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक एकता के लिए चुनौती है, बल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों, विशेषकर संथाल परगना की अस्मिता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।

मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए यह आवश्यक है कि इसे केवल एक राजनीतिक बयानबाजी के रूप में नहीं देखा जाए, बल्कि व्यापक सामाजिक और संवैधानिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण किया जाए।

संविधान बनाम शरीयत: असली टकराव क्या है?

भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता देता है, लेकिन जब कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर होता है, तो उससे अपेक्षा की जाती है कि वह निजी धार्मिक आग्रहों से ऊपर उठकर कार्य करेगा। यदि कोई मंत्री सार्वजनिक मंचों से शरीयत को संविधान से ऊपर मानने जैसे संकेत देता है, तो यह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा बनता है।

आदिवासी अस्मिता की अनदेखी?

झारखंड, विशेषकर संथाल परगना, एक विशिष्ट आदिवासी सांस्कृतिक पहचान वाला क्षेत्र है। यदि राज्य सरकार में शामिल कोई मंत्री ऐसी विचारधारा का समर्थन करता है जो इस सांस्कृतिक ताने-बाने से मेल नहीं खाती, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकार की प्राथमिकता किसकी है — राज्य के मूल निवासी या राजनीतिक समीकरण?

राजनीतिक दलों की ज़िम्मेदारी

इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका दावा है कि मंत्री हफ़ीज़ुल हसन गरीबों, दलितों और आदिवासियों के वोट से सत्ता तक पहुंचे और अब इस्लामिक एजेंडा लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि, यह वक्त है कि पक्ष-विपक्ष के सभी दल इस विषय पर राजनीतिक रोटियां सेंकने के बजाय आत्ममंथन करें कि क्या ऐसी विचारधाराएं राज्य और देश की लोकतांत्रिक संरचना के लिए हितकारी हैं?

बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा?

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मंत्री हफ़ीज़ुल हसन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा:

“मंत्री हफ़ीज़ुल हसन के लिए संविधान नहीं, शरीयत मायने रखता है, क्योंकि ये अपने ‘लक्ष्य’ के प्रति स्पष्ट हैं और सिर्फ अपने कौम के प्रति वफादार हैं।”

“चुनाव के समय इन्होंने गरीब, दलित, आदिवासियों के सामने हाथ जोड़कर वोट मांगा और अब अपना इस्लामिक एजेंडा चलाने की कोशिश कर रहे हैं।”

“हफ़ीज़ुल की यह कट्टर सोच पूरे प्रदेश, विशेषकर संथाल परगना की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी अस्मिता के लिए खतरा बनती जा रही है।”

“संवैधानिक पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति यदि कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देता है, तो वह न सिर्फ वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा उत्पन्न करता है। इस विषय में राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर सभी पक्षों के नेताओं को आत्ममंथन करने की जरूरत है।”

“शरीयत, बाबासाहब द्वारा रचित संविधान की मूल भावना के विपरीत है। यदि राहुल गांधी और हेमंत सोरेन में संविधान के प्रति सच्ची आस्था है, तो उन्हें तुरंत हफ़ीज़ुल हसन को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए।”

राहुल गांधी और हेमंत सोरेन की परीक्षा

कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की साझा सरकार में हफ़ीज़ुल हसन मंत्री पद पर हैं। यदि वाकई राहुल गांधी और हेमंत सोरेन को भारत के संविधान और बाबा साहब आंबेडकर की मूल भावना में आस्था है, तो उन्हें यह तय करना होगा कि क्या एक कट्टरपंथी सोच वाले मंत्री को मंत्रिमंडल में स्थान देना लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुकूल है?

निष्कर्ष:

भारत की विविधता इसकी ताकत है, लेकिन जब कोई संवैधानिक पदाधिकारी निजी धार्मिक आग्रहों को सार्वजनिक नीति पर हावी करने की कोशिश करता है, तो यह स्थिति चिंताजनक हो जाती है। ऐसे में सत्ता पक्ष को आत्ममंथन और विपक्ष को रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की ज़रूरत है — ताकि संविधान की आत्मा सुरक्षित रह सके।

आदिवासी अस्मिता संकट झारखंड कैबिनेट विवाद झारखंड मंत्री विवाद झारखंड राजनीति 2025 धार्मिक कट्टरता बनाम लोकतंत्र बाबूलाल मरांडी हमला शरीयत बनाम संविधान संथाल परगना विवाद हफ़ीज़ुल हसन बयान हेमंत सोरेन प्रतिक्रिया
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email
Previous Articleआज से शुरू होगा झामुमो का 13वां महाधिवेशन, लंबित विधेयकों और आरक्षण पर लाए जाएंगे नए प्रस्ताव
Next Article झामुमो महाधिवेशन: वक्फ एक्ट पर विरोध, बंगाल-ओडिशा-असम में विस्तार का ऐलान, भाजपा पर हमला तेज
Priyanshu Jha
  • Website

Related Posts

झारखंड में देश का पहला माइनिंग टूरिज्म शुरू, जनता के लिए खुलेगी अब खदानों की रहस्यमयी दुनिया

July 21, 2025

झारखंड में फर्जी दान रसीद घोटाला: पटना से जुड़े तार, आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई

July 16, 2025

417 एकड़ वन भूमि घोटाला: झारखंड में CID जांच से उजागर हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा

July 10, 2025

JMM के पहले अध्यक्ष सोरेन परिवार से नहीं थे: जानिए विनोद बिहारी से हेमंत सोरेन तक का इतिहास

April 16, 2025

Comments are closed.

Ad
Ad
Our Picks
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • YouTube
Don't Miss
जरूर पढ़ें

मुंबई में बड़ा स्कैम: सोने के सिक्कों के नाम पर परिवार से 30 लाख की ठगी,मुंबई पुलिस से कार्रवाई की मांग

By Priyanshu JhaAugust 26, 20250

मुंबई में सोने के सिक्कों की नकली डील दिखाकर एक परिवार से 30 लाख रुपये की ठगी हुई। पीड़ित ने The Mediawala Express संपादक प्रियंशु झा से पूरी घटना साझा की और सबूत देने की बात कही। पुलिस से तुरंत कार्रवाई की अपील।

झारखंड में सड़क निर्माण पर कैग रिपोर्ट का बड़ा खुलासा, अब तक करोड़ों रुपए हुए बर्बाद

August 25, 2025

झारखंड में भी लागू होगा SIR? पूर्व मुख्यमंत्री का दावा, बोले- “फर्जी वोटर्स की होगी पहचान”

August 23, 2025

झारखंड में बड़ा जमीन घोटाला: फर्जी कागज़ों से बेची गई 10 करोड़ की सरकारी ज़मीन, एफआईआर का आदेश

August 20, 2025

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

About Us
About Us

मीडिया वाला एक्सप्रेस एक ऐसा डिजिटल समाचार का मंच है, जहां आपको सीधे सच्ची खबर मिलती है। दिन प्रतिदिन देश विदेश व प्रदेश में क्या घटनाएं हो रही है, वह सारा समाचार आपके पास पहुंचाने की जिम्मेवारी हमारी है।
We're accepting new partnerships right now.

Head Office: The Mediawala Express, Second Floor, Above DCB bank, Vikas Chowk, Near Vikas Vidyalaya, Neori, Ranchi, Jharkhand, 835217
Email Us: digital@themediawalaexpress.live
Contact: +91 94717 10036

Our Picks

मुंबई में बड़ा स्कैम: सोने के सिक्कों के नाम पर परिवार से 30 लाख की ठगी,मुंबई पुलिस से कार्रवाई की मांग

August 26, 2025

झारखंड में सड़क निर्माण पर कैग रिपोर्ट का बड़ा खुलासा, अब तक करोड़ों रुपए हुए बर्बाद

August 25, 2025

झारखंड में भी लागू होगा SIR? पूर्व मुख्यमंत्री का दावा, बोले- “फर्जी वोटर्स की होगी पहचान”

August 23, 2025
Quick Link
  • Home
  • Political
  • Country/State
  • Bihar/Jharkhand
  • World
  • Religion/Culture
  • Technology
  • Trending
  • Entertainment
The Mediawala Express
Facebook X (Twitter) LinkedIn YouTube
© 2026 TheMediaWala. Designed by Protonshub Technologies.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Sign In or Register

Welcome Back!

Login to your account below.

Lost password?