द फॉलोअप | उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी की सभाओं और समाजवादी पार्टी (सपा) पर ओवैसी के हमलों के बीच छोटे दलों को साथ लाकर अलग चुनावी मोर्चा बनाने की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। इस संभावित समीकरण में आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि, दोनों दलों के बीच गठबंधन की औपचारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है AIMIM
AIMIM ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जून 2026 में ही अभियान शुरू कर दिया था। बहराइच की मटेरा सीट से पार्टी ने उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार घोषित किया था। पार्टी मुस्लिम मतदाताओं के साथ अन्य वंचित समुदायों के बीच भी अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
अक्टूबर में श्रावस्ती के भिनगा क्षेत्र में भी पार्टी की सभा हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, AIMIM ने यहां दद्दन खान को उम्मीदवार घोषित किया। पार्टी की सभाओं में ओवैसी सपा और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के राजनीतिक दावों पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका जोर इस बात पर रहा है कि मुस्लिम समुदाय और अन्य वंचित समूहों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए।
सपा के लिए क्यों अहम है यह राजनीतिक गतिविधि?
उत्तर प्रदेश में सपा लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं के एक हिस्से का समर्थन हासिल करती रही है। ऐसे में यदि AIMIM कुछ सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारती है, तो बहुकोणीय मुकाबलों में मतों का बंटवारा चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका असर हर सीट पर एक जैसा होगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा। उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे, जातीय समीकरण और मतदान का रुझान भी परिणाम तय करने में भूमिका निभाते हैं।
AIMIM की रणनीति का वास्तविक असर चुनाव के करीब आने पर ही बेहतर तरीके से आंका जा सकेगा। फिलहाल पार्टी की सक्रियता और सपा के साथ उसकी राजनीतिक बयानबाजी चुनावी चर्चा का हिस्सा बनी हुई है।
तीसरे मोर्चे की चर्चा, लेकिन गठबंधन अभी तय नहीं
AIMIM और चंद्रशेखर आजाद की पार्टी को लेकर तीसरे मोर्चे की अटकलें पहले भी सामने आ चुकी हैं। जून और जुलाई 2026 की रिपोर्टों में स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनतांत्रिक पार्टी, आजाद समाज पार्टी और AIMIM सहित छोटे दलों के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल की चर्चा हुई थी।
सोशल मीडिया पर नेताओं के एक साथ दिखाई देने वाले वीडियो को भी गठबंधन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन किसी वीडियो में नेताओं का साथ दिखना अपने आप में सीट-बंटवारे या औपचारिक गठबंधन का प्रमाण नहीं है। इस संबंध में संबंधित दलों की आधिकारिक घोषणा या नेताओं के स्पष्ट बयान को ही निर्णायक माना जाना चाहिए।
यदि ऐसा मोर्चा बनता है, तो सीटों के बंटवारे, साझा कार्यक्रम और नेतृत्व जैसे सवाल अहम होंगे। फिलहाल 40 से 45 सीटों पर AIMIM के चुनाव लड़ने की चर्चा को आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता।
पिछले चुनावों से क्या सबक मिला?
AIMIM ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने अन्य दलों के साथ मिलकर वैकल्पिक राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की, लेकिन उसे सीटों के स्तर पर सफलता नहीं मिली।
अब 2027 के चुनाव से पहले पार्टी संगठन को मजबूत करने, नए क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने और संभावित सहयोगियों की तलाश में जुटी है। दूसरी ओर, यह देखना बाकी है कि छोटे दलों के बीच बातचीत किसी औपचारिक गठबंधन तक पहुंचती है या नहीं और मतदाताओं के बीच उसे कितना समर्थन मिलता है।