कैराना: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। रविवार, 25 अक्टूबर को कैराना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाया और आजमगढ़, बदायूं तथा फिरोजाबाद जैसी लोकसभा सीटों का जिक्र करते हुए मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। इस बयान से यूपी में विपक्षी दलों के बीच संभावित चुनावी समीकरणों पर चर्चा फिर तेज हो सकती है।
ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का नाम बदलकर ‘समाजवादी यादव परिवार’ कर देना चाहिए। उनका आरोप था कि जिन सीटों पर पहले मुस्लिम सांसद चुने जाते थे, वहां अब अखिलेश यादव के परिवार के सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ये ओवैसी के राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें सपा की ओर से प्रमाणित तथ्य या निष्पक्ष चुनावी विश्लेषण नहीं माना जाना चाहिए।
आजमगढ़, बदायूं और फिरोजाबाद का जिक्र
कैराना की सभा में AIMIM प्रमुख ने तीन लोकसभा क्षेत्रों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि आजमगढ़ और फिरोजाबाद जैसी सीटों पर मुस्लिम प्रतिनिधियों की जगह अब यादव परिवार के सदस्य सांसद बने हैं। बदायूं का नाम भी उन्होंने इसी संदर्भ में लिया।
ओवैसी की आलोचना का केंद्र यह था कि मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन हासिल करने वाले दलों में मुस्लिम नेताओं को शीर्ष राजनीतिक पदों और चुनावी प्रतिनिधित्व में पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। उन्होंने अपने भाषण में परिवार आधारित राजनीति पर सवाल उठाते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों से स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व विकसित करने की अपील की।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब विभिन्न दल उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
भाजपा को रोकने के लिए गठबंधन का प्रस्ताव
ओवैसी ने यह भी दोहराया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के उद्देश्य से समान विचार वाले विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि AIMIM योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहती।
AIMIM प्रमुख ने विपक्षी दलों पर अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि भाजपा का मुकाबला करने की इच्छा रखने वाले दलों को इन समुदायों से जुड़े सवालों पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए। ये टिप्पणियां ओवैसी के राजनीतिक रुख और आरोपों को दर्शाती हैं।
हालांकि, गठबंधन को लेकर अभी किसी नए औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं है। इससे पहले अखिलेश यादव ने कहा था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का मौजूदा गठबंधन जारी रहेगा। ऐसे में AIMIM और सपा के बीच चुनावी तालमेल की संभावना पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
रामपुर में भी मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया
कैराना से पहले ओवैसी ने रामपुर की सभा में भी मुस्लिम युवाओं को राजनीति में आगे आने का अवसर देने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी युवाओं को नेतृत्व की भूमिका में लाने और वंचित समुदायों के मुद्दे उठाने के लिए राजनीतिक मंच उपलब्ध कराना चाहती है। इस बयान के जरिए उन्होंने मुस्लिम समुदाय में अपने राजनीतिक नेतृत्व को मजबूत करने की कोशिश का संकेत दिया।
ओवैसी की उत्तर प्रदेश में बढ़ती गतिविधियों को 2027 के चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। AIMIM की सभाओं में मुस्लिम प्रतिनिधित्व, राजनीतिक हिस्सेदारी और विपक्षी गठबंधन जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
क्या यूपी चुनाव में बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?
उत्तर प्रदेश में सपा, कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के बीच चुनावी मुकाबले को देखते हुए AIMIM की रणनीति पर भी नजर है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना, सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में पार्टी की सक्रियता चर्चा में है।
हालांकि, किसी दल की रैली या बयान से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मतदाताओं का समर्थन किस दिशा में जाएगा। चुनावी असर का आकलन उम्मीदवारों, गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल ओवैसी ने सपा नेतृत्व पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है और भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी एकता की पेशकश दोहराई है। चुनाव से पहले इन बयानों का राजनीतिक महत्व रहेगा, लेकिन संभावित गठबंधन और उसके असर पर अंतिम निष्कर्ष के लिए आगे के घटनाक्रम का इंतजार करना होगा।