केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में तीन सरकारी कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की तैयारी कर रही है। इस योजना में इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL) और कोल इंडिया की दो सहायक कंपनियां—महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) तथा साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL)—शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी परिसंपत्तियों के आधार पर दूसरा पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) लाने की दिशा में भी काम कर रही है।
इससे शेयर बाजार में सरकारी कंपनियों से जुड़े निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं। हालांकि, कंपनियों की लिस्टिंग की तैयारी का मतलब यह नहीं है कि उनके IPO की तारीख, कीमत या अंतिम आकार घोषित हो चुका है। इन विवरणों के लिए संबंधित आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा।
Moneycontrol की 25 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने इन योजनाओं की जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, महानदी कोलफील्ड्स ने IPO के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है, जबकि IIFCL और SECL की लिस्टिंग की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं।
किन तीन सरकारी कंपनियों की लिस्टिंग की तैयारी है?
1. IIFCL: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्त देती है कंपनी
इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड यानी IIFCL पूरी तरह केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है। यह सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने का काम करती है।
IIFCL की शेयर बाजार में लिस्टिंग से निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस क्षेत्र से जुड़ी कंपनी में सीधे निवेश का विकल्प मिल सकता है। प्रस्तावित IPO में सरकार की मौजूदा हिस्सेदारी बेचने और नए शेयर जारी करने की संभावनाओं पर विचार हो सकता है। हालांकि, इश्यू का स्वरूप, आकार और कीमत आधिकारिक रूप से घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
2. महानदी कोलफील्ड्स: IPO की दिशा में बढ़ा कदम
महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड, कोल इंडिया की सहायक कंपनी है और इसका कारोबार मुख्य रूप से ओडिशा में है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने लगभग 21.83 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया। इस दौरान इसका राजस्व करीब 30,550 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा लगभग 10,698 करोड़ रुपये बताया गया है।
कंपनी के प्रस्तावित IPO में कोल इंडिया अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। सितंबर 2026 में दाखिल ड्राफ्ट दस्तावेजों के मुताबिक, इसके तहत अधिकतम 66.18 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए पेश किए जाने हैं।
OFS में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचता है। इसलिए इस प्रस्ताव में बिक्री से मिलने वाली रकम महानदी कोलफील्ड्स को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाली मूल कंपनी कोल इंडिया को मिलेगी। यह बात निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि OFS और नए शेयर जारी करने से कंपनी को मिलने वाली पूंजी में अंतर होता है।
3. साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स: छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में प्रमुख कारोबार
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) भी कोल इंडिया की सहायक कंपनी है। इसका परिचालन मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में फैला है। गेवरा, कुसमुंडा और दीपका इसकी प्रमुख कोयला खदानों में शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में SECL ने लगभग 17.63 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया और करीब 4,755 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। कंपनी की लिस्टिंग से निवेशकों को कोल इंडिया के पूरे कारोबार में निवेश करने के बजाय उसकी इस सहायक कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर निवेश का विकल्प मिल सकता है।
फिलहाल इसकी लिस्टिंग की तैयारियां चल रही हैं। IPO से जुड़ी अंतिम जानकारी—जैसे शेयरों की संख्या, इश्यू का स्वरूप और समय—आधिकारिक दस्तावेजों के आने पर ही स्पष्ट होगी।
सरकार इन कंपनियों को शेयर बाजार में क्यों ला रही है?
सरकारी कंपनियों की लिस्टिंग से उनके कारोबार का बाजार के आधार पर मूल्यांकन हो सकता है। इसके अलावा, हिस्सेदारी बेचने के जरिए सरकार को राजस्व जुटाने का अवसर मिलता है। सूचीबद्ध होने के बाद कंपनियों पर वित्तीय नतीजों, कारोबारी प्रदर्शन और निवेशकों को जानकारी देने से जुड़े नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी भी रहती है।
हालांकि, हर IPO का वित्तीय प्रभाव अलग होता है। उदाहरण के लिए, IIFCL के मामले में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री से मिलने वाली रकम का प्रवाह अलग हो सकता है, जबकि महानदी कोलफील्ड्स के प्रस्तावित OFS में रकम कोल इंडिया को मिलेगी। इसलिए निवेशकों को सिर्फ कंपनी के नाम या सरकारी स्वामित्व के आधार पर नहीं, बल्कि इश्यू की शर्तों और वित्तीय स्थिति को देखकर निर्णय लेना चाहिए।
दूसरा पब्लिक InvIT लाने की भी योजना
तीन कंपनियों की लिस्टिंग के अलावा सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में दूसरा पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के कुछ हिस्सों की पहचान किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रस्तावित योजना में राजमार्गों से भविष्य में मिलने वाले राजस्व के आधार पर निवेश जुटाने की व्यवस्था हो सकती है।
InvIT एक ऐसा निवेश माध्यम है, जिसके जरिए निवेशक बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों से होने वाली आय में हिस्सा पाने का अवसर हासिल कर सकते हैं। राजमार्गों जैसे परिसंपत्ति-आधारित मॉडल में इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल नई परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।
सरकार ने मार्च 2026 में अपना पहला पब्लिक InvIT पेश किया था, जिसके जरिए लगभग 9,200 करोड़ रुपये जुटाए जाने की रिपोर्ट है। दूसरे InvIT की योजना इसी दिशा में अगला कदम हो सकती है। हालांकि, नए इश्यू की शर्तें, निवेश संरचना और उपलब्ध होने वाली परिसंपत्तियों का अंतिम विवरण जारी होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
निवेशक क्या ध्यान रखें?
IIFCL, MCL और SECL की संभावित लिस्टिंग से निवेशकों के सामने नए विकल्प आ सकते हैं, लेकिन किसी भी IPO में निवेश करने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है:
- IPO की स्थिति: ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल होना, नियामकीय मंजूरी और इश्यू खुलना अलग-अलग चरण हैं।
- इश्यू का स्वरूप: OFS में मौजूदा शेयरधारक शेयर बेचता है, जबकि नए शेयर जारी करने पर कंपनी को पूंजी मिल सकती है।
- वित्तीय प्रदर्शन: मुनाफा, कर्ज, नकदी प्रवाह और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं का आकलन जरूरी है।
- कीमत और जोखिम: सरकारी कंपनी होने से निवेश में मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती। शेयर का मूल्य बाजार की परिस्थितियों और कंपनी के प्रदर्शन से प्रभावित हो सकता है।