द फॉलोअप | इंटरनेशनल डेस्क
चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत क्षेत्र में 24 अक्टूबर की सुबह भूकंप का एक और झटका दर्ज किया गया। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 थी। इसका केंद्र तिब्बत में जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और NCS के आंकड़ों में तीव्रता को लेकर अंतर हो सकता है, इसलिए अंतिम रिपोर्ट में संबंधित एजेंसी का उल्लेख जरूरी है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब 22 अक्टूबर की रात इसी व्यापक क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। उस भूकंप के बाद कई छोटे झटके भी दर्ज किए गए।
22 अक्टूबर के भूकंप से भारी नुकसान
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक, 22 अक्टूबर को आए 7.0 तीव्रता के भूकंप का केंद्र नागकू शहर से लगभग 191 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था। एजेंसी ने इसकी गहराई 18 किलोमीटर दर्ज की। हालांकि, अलग-अलग भूकंप निगरानी एजेंसियों के आकलन में केंद्र की गहराई और स्थान के आंकड़े कुछ अलग हो सकते हैं।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। सैकड़ों मकानों को नुकसान पहुंचा। प्रभावित इलाकों में बचाव दलों को तैनात किया गया और लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम शुरू किया गया। घायलों और क्षति के आंकड़ों में समय के साथ बदलाव संभव है।
राहत और बचाव अभियान जारी
भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चलाए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, तलाशी अभियान में तकनीकी संसाधनों, उपग्रहों और ड्रोन की मदद भी ली गई। प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था और परिवहन पर पड़े असर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित एजेंसियों की गतिविधियां अहम बनी हुई हैं।
तिब्बती पठार में क्यों आते हैं भूकंप?
तिब्बती पठार भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में स्थित है। भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की परस्पर गति के कारण इस क्षेत्र में तनाव पैदा होता है, जिससे भूकंप आ सकते हैं। बड़े भूकंप के बाद छोटे झटके आना भी सामान्य भूकंपीय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, किसी खास झटके को पिछले भूकंप का आफ्टरशॉक घोषित करने के लिए उसके स्थान, समय और भूकंपीय आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी होता है।
ताजा झटके के बाद किसी नए जान-माल के नुकसान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि उपलब्ध आंकड़ों से नहीं हो सकी है। इसलिए नुकसान की स्थिति पर निष्कर्ष निकालने से पहले स्थानीय प्रशासन और संबंधित भूकंप निगरानी एजेंसियों की अद्यतन जानकारी देखना जरूरी होगा।