ब्रासीलिया: ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के लिए रविवार, 25 अक्टूबर को मतदान हो रहा है। इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा का मुकाबला सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो से है। पहले चरण में फ्लावियो ने बढ़त हासिल की थी, लेकिन अंतिम दौर से पहले हुए सर्वेक्षणों ने मुकाबले को बेहद करीबी बताया। नतीजा तय करेगा कि दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल ब्राजील की कमान अगले कार्यकाल में किसके हाथ में होगी।
ब्राजील के चुनाव प्राधिकरण के अनुसार, पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को आधे से अधिक वैध वोट नहीं मिले थे। इसी वजह से शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मतदान कराया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फ्लावियो बोल्सोनारो को पहले दौर में 47.03% और लूला को 45.16% वैध वोट मिले थे।
पहले दौर में फ्लावियो को मिली थी बढ़त
4 अक्टूबर को हुए पहले चरण के मतदान में फ्लावियो बोल्सोनारो ने लूला से आगे रहकर दूसरे दौर में जगह बनाई। दोनों के बीच अंतर करीब दो प्रतिशत अंक का था। लेकिन पहले चरण में बढ़त हासिल करना राष्ट्रपति पद की जीत की गारंटी नहीं है, क्योंकि दूसरे दौर में मतदाता सीधे दोनों उम्मीदवारों में से एक को चुनते हैं।
चुनाव से पहले जारी सर्वेक्षणों में दोनों नेताओं के बीच अंतर काफी कम दिखा। 24 अक्टूबर को प्रकाशित कई सर्वेक्षणों में फ्लावियो को मामूली बढ़त मिली, लेकिन अंतर संबंधित सर्वेक्षणों की त्रुटि-सीमा के भीतर था। ऐसे में सर्वेक्षणों से किसी एक उम्मीदवार की जीत निश्चित नहीं मानी जा सकती।
महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार रहे प्रमुख मुद्दे
चुनावी प्रचार के दौरान अर्थव्यवस्था, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, अपराध और भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। लूला ने गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और सामाजिक कल्याण की नीतियों को अपनी सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश किया। दूसरी ओर, फ्लावियो ने अपराध पर सख्त कार्रवाई और दक्षिणपंथी राजनीतिक एजेंडे को आगे रखा।
दोनों नेताओं की राजनीति और प्राथमिकताएं अलग हैं। लूला वामपंथी वर्कर्स पार्टी से आते हैं, जबकि फ्लावियो लिबरल पार्टी के नेता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। चुनाव में मतदाताओं का फैसला इन नीतिगत प्राथमिकताओं और सरकार के कामकाज को लेकर उनकी राय पर निर्भर करेगा।
लूला चौथे कार्यकाल की कोशिश में
80 वर्षीय लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक दो कार्यकाल ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। 2023 में उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति पद संभाला था। अब वह एक और कार्यकाल हासिल करने की कोशिश में हैं।
लूला की राजनीति में सामाजिक कल्याण, गरीब परिवारों को सहायता और आय में असमानता कम करने के मुद्दे अहम रहे हैं। हालांकि, मौजूदा चुनाव में महंगाई और अपराध को लेकर मतदाताओं की चिंताएं उनकी सरकार के सामने चुनौती बनी हुई हैं।
फ्लावियो बोल्सोनारो पहली बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में
45 वर्षीय फ्लावियो बोल्सोनारो पेशे से वकील और रियो डी जेनेरियो से सीनेटर हैं। वह पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पिता जायर बोल्सोनारो 2019 से 2022 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रहे थे और देश की दक्षिणपंथी राजनीति में उनका प्रभाव अब भी महत्वपूर्ण है।
फ्लावियो ने अपने पिता के समर्थकों के बीच मौजूद राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश की है। जायर बोल्सोनारो को 2022 के चुनाव के बाद तख्तापलट की साजिश से जुड़े मामले में 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। यह मामला चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बना।
मतदान में भागीदारी भी बन सकती है निर्णायक
पहले दौर में करीब 21.08% पंजीकृत मतदाताओं ने मतदान नहीं किया था। यह आंकड़ा बताता है कि मतदाताओं की भागीदारी दूसरे दौर में भी अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, पहले मतदान नहीं करने वालों में से कितने लोग इस बार वोट डालेंगे, इसका अनुमान निश्चित रूप से नहीं लगाया जा सकता।
अमेरिका और चीन के साथ रिश्तों पर भी नजर
ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और BRICS समूह का संस्थापक सदस्य है। इसलिए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का असर देश की घरेलू नीतियों के साथ-साथ उसकी विदेश नीति पर भी पड़ सकता है।
लूला के नेतृत्व में ब्राजील ने चीन और BRICS देशों के साथ सहयोग को महत्व दिया है। वहीं, फ्लावियो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीब माना जाता है। उनके सत्ता में आने से ब्राजील की विदेश नीति की प्राथमिकताओं में बदलाव की संभावना पर चर्चा हो रही है, हालांकि वास्तविक दिशा नई सरकार की नीतियों और फैसलों से ही स्पष्ट होगी।
कब आएंगे चुनाव के नतीजे?
ब्राजील के चुनाव प्राधिकरण के मुताबिक, मतगणना के परिणाम ब्रासीलिया के स्थानीय समयानुसार शाम 5 बजे से जारी होने लगेंगे। शुरुआती रुझानों के बाद मतगणना पूरी होने पर तस्वीर साफ होगी। अंतिम नतीजों से ही तय होगा कि लूला राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे या फ्लावियो बोल्सोनारो पहली बार देश के राष्ट्रपति बनेंगे।