झारखंड-बिहार के बीच सोन नदी जल विवाद खत्म: अमित शाह की अध्यक्षता में ऐतिहासिक समझौता
रांची। वर्षों से चला आ रहा झारखंड और बिहार के बीच सोन नदी के जल बंटवारे का विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान दोनों राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। बैठक में झारखंड और बिहार ने संयुक्त रूप से यह तय किया कि सोन नदी के 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी में से 5.75 MAF बिहार को और 2.00 MAF झारखंड को मिलेगा।
दो दशकों से लंबित विवाद का समाधान
झारखंड राज्य के गठन (वर्ष 2000) के बाद यह सवाल उठा कि पूर्ववर्ती बिहार को जो पानी आवंटित हुआ था, उसमें नए राज्य झारखंड का भी अधिकार होना चाहिए। लेकिन बिहार सरकार 1973 के त्रिपक्षीय समझौते (बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश) के आधार पर संपूर्ण 7.75 MAF पानी पर दावा करती रही। वहीं, झारखंड अपनी भौगोलिक स्थिति और आवश्यकताओं को देखते हुए कम से कम आधे हिस्से की मांग करता रहा।
अनेक बार केंद्र स्तर पर बैठकें हुईं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया था। अब इस समझौते से न केवल दोनों राज्यों के बीच जल विवाद समाप्त हुआ है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और कृषि के लिए एक नई राह भी खुली है।
जल बंटवारे का नया फॉर्मूला
| राज्य | आवंटित पानी (MAF) |
| बिहार | 5.75 |
| झारखंड | 2.00 |
1973 की बाणसागर परियोजना और झारखंड की नई हिस्सेदारी
1973 में जब बाणसागर परियोजना के तहत सोन नदी का पानी मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच बांटा गया था, तब झारखंड अस्तित्व में नहीं था। लेकिन अब, भौगोलिक स्थिति और नदियों के प्रवाह क्षेत्र के आधार पर झारखंड को उसका हिस्सा मिला है। यह समझौता एक न्यायसंगत और व्यावहारिक समाधान के रूप में सामने आया है।
कृषि और क्षेत्रीय विकास पर असर
सोन नदी को दक्षिण बिहार की लाइफलाइन माना जाता है, खासकर गंगा के दक्षिणी क्षेत्र में। अब झारखंड को भी इसका पानी मिलने से गढ़वा, पलामू, लातेहार जैसे जिलों की सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। इससे झारखंड में खेती और ग्रामीण आजीविका को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
बैठक में शामिल प्रमुख नेता
- गृह मंत्री अमित शाह (अध्यक्षता)
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (झारखंड)
- उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (बिहार प्रतिनिधित्व)