रांची |
“भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले” के तौर पर अपनी छवि बनाने वाले विधायक सरयू राय अब खुद अदालत के कटघरे में हैं। कोरोना काल की अफरा-तफरी में स्वास्थ्य विभाग की गोपनीय फाइलें प्रेस में लीक करने के मामले में उनके खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं।
बुधवार को MP/MLA विशेष अदालत में न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा ने व्यक्तिगत रूप से सरयू राय को आरोप पढ़कर सुनाए।
सरयू राय खुद कोर्ट में मौजूद रहे, उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए ट्रायल फेस करने की बात कही।
क्या है मामला — दो साल पुराना, लेकिन अब निर्णायक मोड़ पर
2 मई 2022 को स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव विजय वर्मा ने डोरंडा थाना में FIR कराई थी।
आरोप था कि सरयू राय ने विभागीय फाइलें और गोपनीय रेकॉर्ड प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए, जो Official Secrets Act और IPC की धाराओं का उल्लंघन है।
FIR में धाराएं:
- IPC की 5 धाराएं (उकसाने, साजिश, आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी)
- Official Secrets Act की 3 धाराएं (गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करना)
राजनीतिक चश्मे से देखें तो क्या दिखता है?
क्या ये एक नेता का सच सामने लाने वाला साहस था? या खुद को मसीहा बताने की शातिर स्क्रिप्ट?
सरयू राय कोई RTI कार्यकर्ता नहीं, जनप्रतिनिधि हैं।
क्या उन्हें नहीं पता था कि गोपनीय दस्तावेज प्रेस में दिखाना कानूनी रूप से अपराध है?
या फिर जान-बूझकर ऐसा किया ताकि सरकार को बदनाम किया जाए और खुद को “ईमानदारी की मूरत” की तरह पेश किया जा सके?
तीखे सवाल जो जनता पूछ रही है:
- अगर दस्तावेज़ गोपनीय नहीं थे, तो FIR क्यों हुई?
- प्रेस से पहले सरकार, CAG या अदालत को क्यों नहीं सौंपे गए दस्तावेज?
- ये दस्तावेज़ लीक हुए कैसे? क्या सिस्टम में बैठे अफसर आपके एजेंट थे?
- आप ट्रायल फेस करेंगे — पर जनता को जवाब कौन देगा?
मामले की टाइमलाइन:
तारीख घटनाक्रम 2 मई 2022 डोरंडा थाना में FIR दर्ज 24 अगस्त 2024 कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया 20 मई 2025 पुलिस ने दस्तावेज सौंपे 16 जुलाई 2025 कोर्ट में आरोप तय 12 अगस्त 2025 अगली सुनवाई‘खुलासे’ के नाम पर कानून तोड़ना क्या अब राजनीतिक ट्रेंड बन गया है?
सरयू राय ने कहा कि उन्होंने जनहित में फाइलें दिखाईं।
पर सवाल ये है —
क्या जनता का भला करने के नाम पर संविधान तोड़ने की छूट मिल सकती है?
क्या ये “जनसेवा नहीं, जनभावनाओं की चालाकी से की गई खुद की ब्रांडिंग” नहीं थी?
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The Mediawala Express का Editorial Stand:
“सरयू राय इस केस में दोषी हैं या नहीं — इसका फैसला अदालत करेगी,
लेकिन जनता को यह समझना चाहिए कि गोपनीयता के साथ खिलवाड़ और कानून को बायपास कर देना, लोकतंत्र की सेवा नहीं, उसका उपहास है।”