भोजपुरी और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता रवि किशन का ‘बिग बॉस’ के पहले सीजन का अनुभव काफी उथल-पुथल भरा रहा था। शो के दौरान वह इतने परेशान हो गए थे कि घर से बाहर निकलने के लिए छत तोड़ने तक की कोशिश करने लगे। उन्होंने गुस्से में माइक के तार भी चबा दिए थे। बाद में पत्नी और बेटी की तस्वीर मिलने पर उन्हें एहसास हुआ कि घर के बाहर उनका परिवार उनका इंतजार कर रहा है।
रवि किशन ने नवंबर 2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया टीवी को दिए एक इंटरव्यू में अपने उस दौर के बारे में बताया था। उनके मुताबिक, बिग बॉस के घर में बंद रहने के दौरान उनके मन में करियर, छवि और भविष्य को लेकर कई तरह की आशंकाएं उठने लगी थीं।
करियर खत्म होने का सताने लगा था डर
रवि किशन ने बताया कि शो में रहते हुए उन्हें लगने लगा था कि अब शायद उन्हें फिल्मों में काम नहीं मिलेगा। वह सोचते थे कि लोग उनके व्यवहार और टीवी पर दिखाई जाने वाली छवि को किस नजर से देखेंगे। लगातार एक ही माहौल में रहने के कारण उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
उन्होंने अपने उस अनुभव को याद करते हुए बताया कि वह कभी-कभी बेहद आक्रामक हो जाते थे। इसी गुस्से में उन्होंने घर से निकलने की कोशिश की और माइक के तार चबाकर फेंक दिए। छत तोड़कर बाहर जाने की उनकी कोशिश भी इसी बेचैनी का हिस्सा थी।
पत्नी और बेटी की तस्वीर देखकर बदला नजरिया
अभिनेता के मुताबिक, शो के दौरान उन्हें पत्नी और बेटी की तस्वीर मिली। उस तस्वीर ने उन्हें अपने परिवार की याद दिलाई और एहसास कराया कि बाहर ऐसे लोग हैं जिन्हें उनकी परवाह है और जो उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
इस अनुभव ने उनके सोचने के तरीके को प्रभावित किया। इससे पहले वह अपने भविष्य और करियर को लेकर नकारात्मक विचारों में उलझे हुए थे। परिवार की तस्वीर मिलने के बाद उन्हें अपने रिश्तों और बाहर की जिंदगी का महत्व फिर से महसूस हुआ।
बिग बॉस से मिली व्यापक पहचान
रवि किशन के लिए बिग बॉस का अनुभव केवल एक रियलिटी शो तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया कि शुरुआती सीजन के बाद उन्हें बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिला। उनकी लोकप्रियता भोजपुरी सिनेमा के दर्शकों से आगे भी फैली।
‘जिंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा’ उनका चर्चित संवाद बना, जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं। फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने टेलीविजन और राजनीति में भी अपनी पहचान कायम की। वह गोरखपुर से लोकसभा सांसद भी रहे हैं।
रवि किशन का यह पुराना अनुभव दिखाता है कि कैमरों के सामने दिखने वाली शख्सियत के पीछे भी तनाव, असुरक्षा और भावनात्मक उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। उनके लिए परिवार की तस्वीर उस कठिन दौर में सोच बदलने वाला एक अहम पल साबित हुई।