रांची, 6 जुलाई 2025
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत झारखंड सरकार केंद्र से 227.66 करोड़ रुपये की बकाया राशि की मांग कर रही है। राज्य सरकार ने इस संबंध में अब तक 16 बार पत्राचार किया है, लेकिन केंद्र से अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।
इस योजना के तहत वर्ष 2020-21 से लेकर 2022-23 तक झारखंड में सात चरणों में मुफ्त खाद्यान्न वितरण किया गया था। योजना को केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और ज़रूरतमंद वर्ग को राहत देने के उद्देश्य से लागू किया था। इसके तहत झारखंड में कुल 3.30 करोड़ क्विंटल खाद्यान्न का वितरण किया गया।
हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में खाद्यान्न के अंतरराज्यीय परिवहन, संचालन, डीलरों के कमीशन और अतिरिक्त डीलर मार्जिन के लिए उसे केंद्र से कुल 531.55 करोड़ रुपये मिलने चाहिए थे। लेकिन अब तक केवल 303.90 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। शेष 227.66 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं।
पहली चिट्ठी 2021 में, आखिरी हाल ही में
झारखंड के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने पहली बार 23 दिसंबर 2021 को केंद्र को पत्र लिखकर बकाया भुगतान की मांग की थी। इसके बाद लगातार 16 बार पत्राचार किया गया, जिसमें आखिरी पत्र 25 जून 2025 को भेजा गया। हर पत्र में एक ही बात दोहराई गई — केंद्र को डीलर मार्जिन, लॉजिस्टिक्स और वितरण से जुड़ी लागत का भुगतान करना चाहिए।
भुगतान में देरी के कारण
सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच डीलर मार्जिन की दरों को लेकर मतभेद हैं। साथ ही, दूरदराज़ क्षेत्रों में स्थित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों में नेटवर्क समस्याओं और वितरण की व्यावहारिक चुनौतियों को भी भुगतान में देरी का कारण बताया जा रहा है।
झारखंड सरकार का कहना है कि राज्य ने केंद्र के निर्देशों का पालन करते हुए योजना को लागू किया, और बड़ी संख्या में ज़रूरतमंद लोगों तक खाद्यान्न पहुँचाया। ऐसे में, बकाया राशि की अदायगी न होना न केवल राज्य के आर्थिक संतुलन को प्रभावित करता है, बल्कि पीडीएस प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
योजना का समापन और बकाया का प्रश्न
यह योजना दिसंबर 2022 में समाप्त कर दी गई थी। हालांकि, योजना की समाप्ति के दो साल बाद भी राज्य को उसके हिस्से का भुगतान नहीं मिल पाया है। झारखंड सरकार का तर्क है कि जब तक पूर्ण भुगतान नहीं होता, तब तक योजना की निष्पक्षता और राज्यों के प्रति केंद्र की जवाबदेही पर सवाल उठते रहेंगे।
निष्कर्ष
झारखंड सरकार अब केंद्र से जवाब की प्रतीक्षा कर रही है कि आखिर क्यों कई बार पत्राचार के बाद भी 227.66 करोड़ रुपये की बकाया राशि अब तक जारी नहीं की गई है। यह विवाद न सिर्फ वित्तीय समन्वय की दिशा में एक चुनौती है, बल्कि संघीय ढांचे में पारदर्शिता और सहयोग की भावना की भी परीक्षा है।