2025 के चुनावी वर्ष में जब अधिकांश राज्य बीजेपी अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत कर रहे हैं, वहीं झारखंड अब तक अपने नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं कर पाया है। फरवरी में पूरा हो जाना था यह प्रक्रिया, लेकिन अब तक सिर्फ बूथ स्तर के चुनाव ही संपन्न हुए हैं।
भाजपा के सांगठनिक नियमों के अनुसार, 515 मंडलों में से आधे मंडलों के चुनाव होने के बाद ही जिला अध्यक्षों का चुनाव किया जा सकता है। और जब जिलाध्यक्ष चुने जाएंगे, तभी आगे प्रदेश अध्यक्ष की राह खुलेगी। लेकिन अब तक मंडल स्तर के कई क्षेत्रों में चुनाव या तो अधूरे हैं या विवादों में उलझे हुए हैं।
क्यों हो रही है इतनी देरी?
- मंडल स्तर पर विवाद और असहमति
कई क्षेत्रों में संगठन के अंदर ही सामंजस्य की कमी और गुटबाज़ी के कारण चुनाव प्रक्रिया में रुकावटें आई हैं। - विधानसभा चुनाव की व्यस्तता
राज्य के नेताओं का तर्क है कि विधानसभा चुनावों के चलते सांगठनिक प्रक्रिया को प्राथमिकता नहीं दी जा सकी। - राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रतीक्षा
संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अब प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद ही संभव होगी।
अन्य राज्यों की स्थिति
महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी और कर्नाटक जैसे राज्यों में जिलाध्यक्षों के चुनाव पूरे हो चुके हैं और नए अध्यक्ष भी घोषित किए जा चुके हैं। महाराष्ट्र में तो 1 जुलाई को ही नए प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यभार संभाल लिया।
झारखंड के मामले में यह देरी अब पूरे संगठन की प्रतिनिधित्व क्षमता को प्रभावित कर रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में राज्य की भूमिका शून्य हो सकती है।
अब आगे क्या?
संकेत साफ हैं — अब झारखंड को नया प्रदेश अध्यक्ष तभी मिलेगा जब नव नियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष इस पर फैसला लेंगे। इसका मतलब है कि संगठन की गाड़ी तब तक धीमी ही रहेगी।
पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की नज़र अब केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी है, ताकि संगठन में एक नई ऊर्जा लाई जा सके।