रांची – झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के हजारों बीएड धारक अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दो वर्षीय बीएड कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से बाहर करना गलत था। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि इन उम्मीदवारों के दस्तावेजों का पुनः सत्यापन कर उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
कोर्ट में क्या हुआ?
यह मामला तब सामने आया जब कई ऐसे अभ्यर्थियों को, जिन्होंने वर्ष 2014 के बाद NCTE द्वारा निर्धारित दो वर्ष की बीएड डिग्री प्राप्त की थी, आयोग द्वारा दस्तावेज सत्यापन के समय यह कहकर बाहर कर दिया गया कि विज्ञापन में केवल एक वर्षीय बीएड की बात कही गई है।
प्रार्थियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सोमवार को यह निर्णय सुनाया। वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और वर्मा कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने बीएड को दो वर्ष का अनिवार्य कर दिया था।
बीएड की वैधता और आयोग की चूक
यह भी बताया गया कि रांची विश्वविद्यालय सहित झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों में अब बीएड की पढ़ाई दो वर्ष की ही होती है और यह NCTE की वैध मान्यता प्राप्त है। ऐसे में आयोग द्वारा उन्हें अयोग्य ठहराना न केवल अनुचित, बल्कि शिक्षा नीति और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत है।
कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि—
“बीएड की दो वर्ष की डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को केवल इस आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता कि विज्ञापन में एक वर्ष का उल्लेख है। यह उम्मीदवार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता से अधिक योग्य हैं।”
इसलिए ऐसे सभी अभ्यर्थियों को अब चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, और उनके दस्तावेजों की समीक्षा दोबारा की जाएगी।