रांची, 1 जुलाई 2025 | विशेष संवाददाता
झारखंड के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले देवड़ी मंदिर के समग्र विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक तमाड़ क्षेत्र के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सांस्कृतिक विशेषज्ञ शामिल हुए।
मंदिर की पौराणिक और सांस्कृतिक महत्ता
देवड़ी मंदिर न केवल झारखंड का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है। मंदिर में विराजमान 16 भुजाओं वाली माँ दुर्गा की मूर्ति अपने आप में अद्वितीय है। यह मंदिर झारखंडी वास्तुकला, पौराणिक इतिहास और स्थानीय मान्यताओं का संगम प्रस्तुत करता है। श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का केंद्र बन चुका है।
बैठक में उठाए गए प्रमुख बिंदु
इस उच्चस्तरीय बैठक में देवड़ी मंदिर को एक समृद्ध और व्यवस्थित तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने को लेकर कई प्रस्तावों पर विचार हुआ। प्रमुख बिंदुओं में शामिल थे:
- मंदिर परिसर का पुनर्विकास और उसके वास्तुशिल्पीय स्वरूप का संरक्षण
- श्रद्धालुओं के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाओं की स्थापना, जैसे पेयजल, शौचालय, विश्रामगृह आदि
- मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण
- पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था और वाहनों के निर्बाध संचालन की योजना
- मंदिर परिसर में प्रकाश व्यवस्था, डिजिटल सूचना पैनल और सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना
- आसपास के क्षेत्र का समग्र पर्यटन विकास योजना में शामिल करना
अधिकारियों की भागीदारी
बैठक में नगर विकास विभाग, पर्यटन विभाग, रांची जिला प्रशासन, झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम, आर्किटेक्ट सलाहकार समूह, देवड़ी मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी ने अपने-अपने सुझावों के माध्यम से मंदिर के व्यवस्थित और संतुलित विकास की रूपरेखा तैयार की।
सरकार की प्रतिबद्धता
विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने स्पष्ट किया कि हेमंत सोरेन सरकार न केवल मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और मूल स्वरूप के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि पूरे क्षेत्र को एक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके माध्यम से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर की महिमा केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता से भी जुड़ी हुई है, इसलिए इसका विकास केवल एक परियोजना नहीं बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास होगा।
निष्कर्ष:
देवड़ी मंदिर के विकास को लेकर हुई यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि झारखंड सरकार धार्मिक स्थलों के आधुनिकीकरण और उनके संरक्षण को लेकर गंभीर है। इस पहल से एक ओर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं झारखंड को एक समृद्ध धार्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।