रांची में राजनीतिक हत्या की जांच में देरी: 101 दिन बाद पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
रांची में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेता इंद्रजीत कुमार उर्फ अनिल टाइगर की हत्या को लेकर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। हत्या के 101 दिन बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, जिससे पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर फिर से बहस शुरू हो गई है।
चार्जशीट में पांच नाम, सभी आरोपी जेल में
मुख्य आरोपी के रूप में जिन पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, वे सभी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इन आरोपियों में जिशान अख्तर उर्फ जिशू, अमन सिंह, मनीष कुमार चौरसिया, अजय रजक उर्फ गोलू और रोहित वर्मा शामिल हैं। पुलिस ने इन पर हत्या, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
मुख्य साजिशकर्ता पर अब भी नहीं जुटे पुख्ता सबूत
चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस जिन व्यक्तियों को इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता बता रही है, उनमें प्रमुख नाम देवब्रत नाथ शाहदेव का है, लेकिन उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य चार्जशीट में नहीं जोड़े गए हैं। जांच अब भी जारी है, और फिलहाल देवब्रत को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
हत्या का कारण बताया गया ‘जमीन विवाद’
चार्जशीट में पुलिस ने हत्या की वजह भूमि विवाद को बताया है। हालांकि यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि इतनी गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हत्या के मामले में जांच को 101 दिनों तक खींचने की क्या वजह थी?
हत्या की पूरी घटना: क्या हुआ था 26 मार्च को?
अनिल टाइगर की हत्या 26 मार्च 2025 को कांके चौक के नजदीक स्थित ठाकुर होटल परिसर में कर दी गई थी। दो अज्ञात अपराधियों ने शाम करीब 4 बजे उन पर गोली चला दी थी। मृतक की पत्नी लता देवी ने अगले दिन कांके थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
SIT का गठन और गिरफ्तारी की कार्रवाई
घटना के बाद विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया गया था। डीएसपी अमर कुमार पांडेय के नेतृत्व में 19 सदस्यीय टीम बनाई गई। शुरुआती कार्रवाई में रोहित वर्मा की गिरफ्तारी के बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी।
अब आगे क्या? अगली सुनवाई 17 जुलाई को
सीजेएम कोर्ट ने इस केस में अगली सुनवाई की तारीख 17 जुलाई तय की है। देखने वाली बात होगी कि इस सुनवाई में अदालत चार्जशीट की गति और गंभीरता पर क्या रुख अपनाती है।