रांची, झारखंड

झारखंड में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) अस्पताल एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गया है। शनिवार को नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी नगड़ी गांव पहुंचे और रिम्स-2 परियोजना स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने साफ कहा कि वह किसानों की उपजाऊ जमीन पर अस्पताल निर्माण का विरोध करेंगे। इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और परियोजना को जनता की जरूरत बताया।

मरांडी का आरोप: “सरकार किसानों के हक पर डाका डाल रही है”

नगड़ी पहुंचकर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस भूमि पर रिम्स-2 का निर्माण प्रस्तावित है, वह ग्रामीणों की पुश्तैनी खेती योग्य जमीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना उचित मुआवजा और प्रक्रिया के लोगों की जमीन अधिग्रहित कर रही है। उनका कहना था कि यदि सरकार अस्पताल बनाना ही चाहती है, तो विपक्ष खुद जमीन देने को तैयार है — लेकिन गरीब किसानों की जमीन छीनने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2012-13 में जब इसी क्षेत्र में ट्रिपल आईटी और आईआईएम की योजना बनी थी, तब भी स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया था। मरांडी ने दावा किया कि रैयतों की मालगुजारी रसीदें उस समय तक कट रही थीं और आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। उनके अनुसार, जमीन अधिग्रहण कानून के तहत यदि पांच वर्षों तक अधिग्रहित भूमि का उपयोग नहीं होता, तो वह स्वतः मूल मालिकों को लौट जानी चाहिए।

सरकार का जवाब: “परियोजना पर नहीं हो रहा किसी की निजी जमीन का अतिक्रमण”

इस पूरे विवाद पर झारखंड सरकार की तरफ से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि रिम्स-2 पूरी तरह से राज्य सरकार की स्वामित्व वाली भूमि पर प्रस्तावित है और इससे किसी भी किसान या आदिवासी की निजी जमीन प्रभावित नहीं हो रही है।

उन्होंने मरांडी पर आरोप लगाया कि वह हर विकास कार्य में बाधा डालने की कोशिश करते हैं और रिम्स-2 के माध्यम से झारखंड की स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने की इस पहल को भी राजनीतिक रंग दे रहे हैं। मंत्री ने कहा कि रिम्स-2 की स्थापना से न केवल रांची के रिम्स पर दबाव कम होगा, बल्कि राज्य भर के लोगों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो सकेगी।

“राजनीति से ऊपर हो जनसेवा”: सरकार की अपील

डॉ. अंसारी ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ परियोजना को आगे बढ़ा रही है और सभी समुदायों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह जनहित के मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय सकारात्मक भूमिका निभाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि मरांडी की राजनीति केवल विरोध और भ्रम फैलाने तक सीमित रह गई है।

मंत्री ने याद दिलाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय भी सार्वजनिक हित में भूमि उपयोग किए गए थे, लेकिन तब ऐसी आपत्तियां नहीं उठी थीं। उनका कहना था कि विकास कार्यों को अवरुद्ध करने से आम जनता को ही नुकसान होता है।

निष्कर्ष

रिम्स-2 परियोजना को लेकर जिस तरह से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, वह स्पष्ट करता है कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवा जैसे संवेदनशील विषय भी अब राजनीतिक बहसों का हिस्सा बनते जा रहे हैं। जहां एक ओर सरकार इसे विकास का प्रतीक मान रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों के अधिकारों का हनन बता रहा है। ऐसे में जनता की नजर अब इस बात पर है कि जमीन, जनहित और जनसेवा के बीच किसकी बात में ज्यादा तथ्य और भविष्य की गारंटी छिपी है।

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