झारखंड हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम को निर्देश दिया है कि जब तक पर्याप्त लीगल अफसरों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक पुराने नियमों के तहत नक्शा पास करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े इस कार्य में अनावश्यक देरी उचित नहीं है।

कोर्ट की टिप्पणी और आदेश:

मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति राजेश कुमार की पीठ ने यह निर्देश दिया। कोर्ट ने रांची नगर निगम के प्रशासक को स्वयं उपस्थित होने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान नगर निगम के प्रशासक सुशांत गौरव ने यह बताया कि फिलहाल पर्याप्त लीगल अफसर नहीं हैं, जिसके कारण नक्शा पास करने में बाधा आ रही है।

इस पर अदालत ने कहा कि जब तक नई नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक पूर्ववर्ती नियमों के अनुसार ही कार्य किया जाए। कोर्ट ने कहा कि आम जनता को बार-बार अनावश्यक इंतजार करना पड़ रहा है, जो सही नहीं है।

नियमों में बदलाव पर कोर्ट की नाराजगी:

कोर्ट को बताया गया कि पहले तीसरे चरण में लीगल अफसर दस्तावेजों की जांच कर 7 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करते थे। अब यह कार्य अपर प्रशासक को सौंप दिया गया है, और नियम में बदलाव का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाए और नियुक्तियों पर तेजी से काम हो।

नक्शा पास की प्रक्रिया में आई रुकावट:

25 अप्रैल से नक्शा पास करने की प्रक्रिया फिर से शुरू हुई है, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी है। क्रेडाई (CREDAI) द्वारा इस पर जनहित याचिका दायर की गई थी। नगर निगम ने बताया कि सहायक लीगल अफसर को फिलहाल प्रभारी बनाया गया है और प्रक्रिया शुरू हो गई है।

अगली सुनवाई की तारीख:

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख तय की है।

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