रांची, 28 जून 2025 | The Mediawala Express

झारखंड में सामने आए शराब घोटाले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस घोटाले में पुलिस हिरासत में चल रहे रायपुर के कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया ने एक सनसनीखेज बयान दिया है। उनके अनुसार, शराब की तस्करी और अनियमित ठेका व्यवस्था के जरिए प्रतिदिन करोड़ों की उगाही की गई, जिसमें तत्कालीन वरीय अधिकारी का सीधा हस्तक्षेप था।

एक कार्टन पर 300 से 600 रुपये तक की अवैध वसूली

सिंघानिया ने जांच एजेंसियों को बताया कि झारखंड में थोक शराब वितरण नीति को जानबूझकर इस तरह बदला गया, जिससे एक विशेष कारोबारी गठजोड़ को फायदा मिल सके। छत्तीसगढ़ मॉडल की तर्ज पर लाई गई एफएल-10 थोक लाइसेंस प्रणाली के जरिए राज्य में ऐसी व्यवस्था लागू की गई, जहां शराब की आपूर्ति करने वाली एजेंसियों से प्रति कार्टन 300 से 600 रुपये की अवैध वसूली की जाती थी।

सिंघानिया का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक सीनियर आईएएस अधिकारी की भूमिका रही, जिन्हें लगभग 40 से 50 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी गई। यह राशि कथित तौर पर प्लेसमेंट एजेंसियों और सलाहकार के माध्यम से उन तक पहुंचाई गई।

छत्तीसगढ़ से आयातित मॉडल और अंदरूनी साजिश

सूत्रों के अनुसार, झारखंड में छत्तीसगढ़ की तर्ज पर जिस नीति को लागू किया गया, उसमें एक बाहरी सलाहकार की मदद से नियमों में संशोधन किया गया। खास बात यह है कि उस सलाहकार को एक राज्य निगम के माध्यम से अनुबंधित किया गया था, ताकि नियमों की आड़ में राज्य के शराब व्यवसाय को एक चुने हुए नेटवर्क के हवाले किया जा सके।

घोटाले में उपयोग की गई डिस्टिलरियों से आने वाली शराब के कार्टन पर वसूली की गई रकम कथित तौर पर नियोजित अधिकारी तक पहुंचाई जाती थी। यह सब कुछ एक सुव्यवस्थित प्रणाली के तहत हुआ, जिसमें कई स्तरों पर अधिकारियों और एजेंसियों की मिलीभगत सामने आ रही है।

प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए मुनाफाखोरी

जांच में यह भी सामने आया है कि प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिये हर शराब दुकान पर ऐसे कर्मचारियों की तैनाती की गई, जो उगाही के इस तंत्र का हिस्सा थे। इन एजेंसियों को टेंडर की शर्तों में हेरफेर कर लाभ पहुंचाया गया और शराब की दुकानों से एमआरपी से अधिक दर पर बिक्री करवाकर अतिरिक्त वसूली की गई।

एसीबी की जांच में जुटे अहम सुराग

झारखंड भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बुधवार को रायपुर में सिंघानिया से गहन पूछताछ की। एजेंसी ने उनसे टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, फर्जी एजेंसियों के संचालन, और अवैध धन के हस्तांतरण से जुड़े कई अहम सवाल पूछे। रिमांड के दौरान मार्शन इनोवेटिव से जुड़े स्थानीय प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह ने भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जो जांच के दायरे में शामिल हैं।

निष्कर्ष

यह घोटाला राज्य की उत्पाद नीति में गहराई तक फैली भ्रष्ट व्यवस्था को उजागर करता है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई बड़े नाम सामने आने की संभावना है। फिलहाल एसीबी और अन्य एजेंसियां इस मामले की परत-दर-परत जांच में जुटी हैं और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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