रांची, 28 जून 2025 | The Mediawala Express
झारखंड सरकार राज्यकर्मियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज के लिए निर्धारित पैकेज राशि को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मौजूदा दरें कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिहाज से अपर्याप्त साबित हो रही हैं, जिसके कारण पैकेज संशोधन की प्रक्रिया तेज की गई है।
पैकेज बढ़ाने पर निजी अस्पतालों की नाराजगी
सरकार के इस प्रयास के बीच कई बड़े और नामी निजी अस्पतालों ने चिंता जाहिर की है। इन संस्थानों का कहना है कि वर्तमान पैकेज दरें अत्यधिक कम हैं और उनके संचालन के लिए व्यावहारिक नहीं हैं। कई अस्पतालों ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें निर्धारित पैकेज के बजाय CGHS (Central Government Health Scheme) की दरों पर इलाज की अनुमति दी जाए।
पैकेज संशोधन के लिए बनी समिति
राज्य सरकार ने इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए 15 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो वर्तमान दरों की समीक्षा कर एक नया उपचार पैकेज प्रस्तावित करेगी। समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है ताकि नीति में तेजी से बदलाव किया जा सके।
बीमा योजना में क्या हैं विशेष प्रावधान?
राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत:
- सामान्य मामलों में हर परिवार को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक के उपचार की सुविधा
- गंभीर बीमारियों के लिए ₹10 लाख तक की सहायता
- कैटेगरी A और B के लाभुकों को 10 लाख से अधिक खर्च की स्थिति में भी निशुल्क इलाज
- विशेष परिस्थितियों में एयर एंबुलेंस/हवाई यात्रा सुविधा भी उपलब्ध
वहीं कैटेगरी B के लाभुकों के लिए ऑनलाइन आवेदन और ₹3000 का एकमुश्त प्रीमियम जमा करने की अंतिम तिथि 30 अगस्त निर्धारित की गई है। योजना की वैधता 1 सितंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक रहेगी।
सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या घटी
राज्यकर्मी बीमा योजना में शामिल होने को लेकर कुछ प्रमुख कॉरपोरेट अस्पतालों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। दिल्ली, मुंबई और रांची के कई नामी संस्थानों—जैसे मेदांता, नारायणा, मैक्स, टीएमएस, मेडिका और पारस—ने मौजूदा पैकेज दरों पर सेवाएं देने से इनकार कर दिया है। इनका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा तय की गई राशि लागत के अनुसार बेहद कम है।
निष्कर्ष
हेमंत सोरेन सरकार का यह कदम राज्यकर्मियों को सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, लेकिन निजी अस्पतालों की आपत्ति इस योजना की राह में चुनौती बन सकती है। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और सरकारी नीतियों में हुए संशोधन यह तय करेंगे कि यह योजना अपने उद्देश्य में कितनी सफल होती
