झारखंड के विकास को गति देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को कोडरमा से बरकाकाना के बीच 133 किलोमीटर लंबी सिंगल रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान की। यह परियोजना न केवल राज्य के औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को मजबूत रेल संपर्क प्रदान करेगी, बल्कि राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी अधिक प्रभावी और सक्षम बनाएगी।

कोडरमा-बरकाकाना सेक्शन: कोयला और इस्पात क्षेत्रों की जीवनरेखा

यह रेल सेक्शन झारखंड के उन क्षेत्रों से होकर गुजरता है जो देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक और खनिज बहुल क्षेत्र हैं। कोडरमा और बरकाकाना के बीच यह मार्ग एक रणनीतिक कॉरिडोर के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह पटना और रांची के बीच सबसे कम दूरी वाला रेल मार्ग भी है। इस सेक्शन के दोहरीकरण से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों दोनों के संचालन में समय और लागत की बड़ी बचत होगी।

परियोजना का प्रमुख उद्देश्य:

  • मौजूदा एकल रेल लाइन की क्षमता सीमित है, जिससे ट्रेनों की गति और फ्रेट मूवमेंट बाधित होता है।
  • दोहरीकरण से मालगाड़ियों के लिए समर्पित ट्रैक संभव हो सकेगा, जिससे भीड़-भाड़ और देरी कम होगी।
  • क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ यह रेल संपर्क औद्योगिक गतिविधियों को तेज करेगा।

प्रभाव क्षेत्र और लाभार्थी

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, कोडरमा-बरकाकाना परियोजना के साथ-साथ कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में एक अन्य रेल परियोजना — बेल्लारी से चिकजाजुर (185 किमी) — को भी मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं की संयुक्त लागत करीब ₹6,405 करोड़ आंकी गई है।

इन रेल योजनाओं से लगभग 28.19 लाख की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। कुल 1,408 गांवों को बेहतर रेल संपर्क प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्रीय कारोबार, कृषि उत्पादन और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।

प्रमुख राज्यों और जिलों में लाभ:

  • झारखंड: कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो जैसे औद्योगिक जिलों को सीधा लाभ
  • कर्नाटक व आंध्र प्रदेश: बेल्लारी, चित्रदुर्ग, अनंतपुर, कडप्पा सहित सात जिलों को कवर

लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बदलाव की उम्मीद

रेल मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना देश की मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स रणनीति का अहम हिस्सा है। दोहरीकरण के बाद इस रूट की माल ढुलाई क्षमता 49 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) तक बढ़ाई जा सकेगी। इसके जरिये कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, उर्वरक, कृषि उत्पाद और पेट्रोलियम जैसे भारी माल की अधिक सुरक्षित और तेज़ ट्रांसपोर्ट सुविधा मिलेगी।

क्लाइमेट और ऊर्जा बचत पर प्रभाव:

रेलवे मंत्री के अनुसार:

  • इन परियोजनाओं से 52 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी
  • 264 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में कटौती संभव है
  • यह प्रभाव 11 करोड़ पेड़ों के बराबर पर्यावरणीय संरक्षण के रूप में गिना जाएगा

रेलवे को पर्यावरण के अनुकूल, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में आगे लाने का यह एक ठोस प्रयास है। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत में कटौती और संचालन की दक्षता में वृद्धि होगी।

पीएम-गति शक्ति मास्टर प्लान का असर

इन परियोजनाओं को ‘पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के तहत स्वीकृति दी गई है, जो एकीकृत बुनियादी ढांचा विकास की महत्वाकांक्षी योजना है। इस मास्टर प्लान का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाकर ढांचागत परियोजनाओं को समयबद्ध और कुशलता से पूरा करना है।

इस मास्टर प्लान के अंतर्गत रेलवे, सड़क, बंदरगाह, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब को जोड़कर देश को एक एकीकृत नेटवर्क के रूप में तैयार किया जा रहा है।

निष्कर्ष:

कोडरमा-बरकाकाना रेल लाइन का दोहरीकरण झारखंड को कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और रोजगार के क्षेत्र में नई दिशा देगा। यह परियोजना न केवल राज्य के खनिज संसाधनों को बाजारों तक पहुंचाने में मददगार होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता को भी मजबूत बनाएगी। यह कदम ‘विकसित भारत’ के विजन की ओर एक और ठोस प्रगति है।

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