लेख का मुख्य सारांश
झारखंड में केंद्रीय कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और उससे जुड़ी निजी कंपनी सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड (SIML) के खिलाफ 417 एकड़ वन भूमि के फर्जी हस्तांतरण और उपयोग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सीआईडी ने विस्तृत जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है। यह जमीन हजारीबाग जिले के केरेडारी अंचल के पांच गांवों में स्थित है, जहां कागजी प्रक्रिया में हेरफेर कर खनन परियोजना के लिए वन भूमि का उपयोग किया गया।
मुख्य बिंदु:
- घोटाले का आकार: 417 एकड़ वन भूमि का फर्जी रूप से पुनः वर्गीकरण कर खनन के लिए उपयोग
- प्रमुख स्थान: मौजा पचड़ा चट्टी, बरियातू, बुकरू, सिजुआ और जोरदाग (हजारीबाग, केरेडारी अंचल)
- आरोपी पक्ष: CCL के कई अधिकारी, SIML कंपनी के निदेशक और प्रबंधक, डीसी कार्यालय और वन विभाग के अधिकारी
- दस्तावेजी साक्ष्य: ओवरराइटिंग, कूट रचना, और प्रमाण पत्रों में फर्जीवाड़ा
- जांच एजेंसी: झारखंड पुलिस की सीआईडी
- शिकायतकर्ता: हजारीबाग निवासी शशिकांत सोनी
जांच में क्या-क्या सामने आया?
- सीआईडी ने पाया कि वन भूमि को कृत्रिम रूप से ‘गैर-वन भूमि’ दिखाकर चंद्रगुप्त ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (OCP) में उपयोग किया गया।
- CCL ने स्वयं 16 अप्रैल 2022 को हजारीबाग डीसी को पत्र लिखकर भूमि को ‘वन भूमि’ बताया था, लेकिन जांच में दावा किया कि यह वन भूमि नहीं है।
- SIML को प्रत्यक्ष लाभ मिला, जो चंद्रगुप्त परियोजना में खनन कार्य कर रही है।
- अंचल अधिकारी कार्यालय से जानबूझकर भूमि रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज गायब कर दिए गए।
जांच में क्या-क्या सामने आया? (विस्तारित विवरण)
- वन भूमि की प्रकृति में हेरफेर:
- सीआईडी को मिले दस्तावेजों में यह पाया गया कि हजारीबाग जिले के केरेडारी अंचल की 417 एकड़ भूमि को गलत तरीके से गैर-वन भूमि घोषित कर दिया गया।
- भूमि की प्रकृति वाले कॉलम में कई स्थानों पर ओवरराइटिंग की गई थी, जिससे यह दर्शाया जा सके कि जमीन पर खनन किया जा सकता है।
- सरकारी प्रक्रिया की अनदेखी:
- भूमि के हस्तांतरण में आवश्यक विभागीय अनुमतियाँ (जैसे वन विभाग की मंजूरी, पर्यावरण स्वीकृति) नहीं ली गई थीं या कागजी तौर पर ग़लत विवरण प्रस्तुत कर प्रक्रिया को दरकिनार किया गया।
- सीसीएल ने हजारीबाग डीसी को 16 अप्रैल 2022 को एक पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने स्वयं भूमि को “वन भूमि” बताया था, लेकिन पूछताछ में उन्होंने इसका खंडन किया।
- SIML को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ:
- SIML को यह भूमि खनन के लिए उपलब्ध करवाई गई, जिससे उन्हें सीधा व्यावसायिक लाभ मिला। आरोप है कि कंपनी को यह ज़मीन अवैध रूप से दी गई और संभावित रूप से अरबों रुपये का मुआवजा भी क्लेम किया गया या किया जा सकता है।
- दस्तावेज गायब होने का मामला:
- जांच में यह सामने आया कि अंचल कार्यालय, केरेडारी से भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जानबूझकर हटा दिए गए या गायब कर दिए गए।
- इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि घोटाला एक संगठित षड्यंत्र के तहत किया गया था जिसमें कई विभागों की मिलीभगत रही।
- जांच के दौरान संदेहास्पद बयान:
- सीआईडी को चंद्रगुप्त ओसीपी के मैनेजर संजीव कुमार द्वारा भेजा गया एक पत्र मिला, जिसमें वन भूमि की प्रकृति के कॉलम में बदलाव पाया गया। पूछताछ में अधिकारी इस ओवरराइटिंग का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
- सीसीएल अधिकारियों ने लिखित रूप से यह दावा किया कि भूमि वन क्षेत्र में नहीं आती, लेकिन उनके ही पूर्व पत्र इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
- भूमि रिकॉर्ड में खाता नंबर या प्रकृति अंकित नहीं:
- जिन जमीनों पर खनन किया जा रहा था, उनमें से कई पर न तो किसी व्यक्ति का वैध खाता नंबर था और न ही भूमि की प्रकृति स्पष्ट रूप से दर्ज थी, जिससे दस्तावेजों की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं।
- संयुक्त षड्यंत्र की आशंका:
- शिकायतकर्ता द्वारा यह आरोप लगाया गया कि CCL, SIML, जिला प्रशासन और वन विभाग के कुछ कर्मियों ने संयुक्त रूप से मिलकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।
