रांची: पूर्वी भारत के चार राज्यों — बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड — की साझा चुनौतियों और विकास को लेकर गुरुवार को राजधानी रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास से जुड़े 31 प्रमुख मुद्दे केंद्र सरकार के समक्ष रखे। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सोरेन ने राज्य के सामाजिक, भौगोलिक और आर्थिक संकटों को गिनाते हुए सहकारी संघवाद की भावना के तहत केंद्र से सहयोग की अपील की।

झारखंड के विकास को लेकर हेमंत सोरेन की 10 प्रमुख मांगें:

  1. साहिबगंज से रांची तक एक्सप्रेस-वे के निर्माण की मांग, जिससे मल्टी-मॉडल टर्मिनल की कनेक्टिविटी मजबूत हो सके।
  2. रांची मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को केंद्र की स्वीकृति और वित्तीय मदद।
  3. मनरेगा मजदूरी दर में वृद्धि और भुगतान प्रक्रिया में तेजी।
  4. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत घर की लागत ₹2 लाख तक बढ़ाने का आग्रह।
  5. झारखंड में जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सहायता।
  6. सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र और राज्य की वित्तीय साझेदारी।
  7. राज्य में रेल नेटवर्क का विस्तार और लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता देना।
  8. साहिबगंज में एयर कार्गो हब के लिए 100% पूंजीगत सहायता।
  9. नमामि गंगे योजना में झारखंड के अन्य शहरों को शामिल करने का प्रस्ताव।
  10. कोल कंपनियों पर बकाया ₹1.40 लाख करोड़ की वसूली में केंद्र की सक्रिय भूमिका।

अन्य अहम मांगें और सुझाव

  • DMFT नीति में संशोधन कर खनन प्रभावितों को अधिक लाभ देने की जरूरत बताई गई।
  • झारखंड में अवैध खनन और माइंस क्लोजर पर कठोर कार्रवाई की मांग।
  • केन्द्रीय बलों की प्रतिनियुक्ति के एवज में राज्य सरकार से राशि की मांग समाप्त करने का आग्रह।
  • RIMS-2 और छह नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग की अपील।
  • महिला सशक्तिकरण के तहत “मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना” का उल्लेख, जिसमें 18-50 वर्ष की महिलाओं को ₹2500 प्रति माह सहायता दी जा रही है।
  • झारखंड के धार्मिक स्थलों को रामायण और बौद्ध सर्किट में शामिल करने का प्रस्ताव ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
  • झारखंड-बिहार के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का मामला भी जोरशोर से उठाया गया।

संविधानिक दृष्टिकोण से सहकारी संघवाद की अपील

मुख्यमंत्री ने केंद्र से कहा कि झारखंड की भौगोलिक विषमताएं और सामाजिक आर्थिक संरचना को देखते हुए राज्य को संवेदनशील समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस क्षेत्रीय परिषद की बैठक से कई वर्षों से लंबित मुद्दों को हल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

विश्लेषण:

यह बैठक सिर्फ एक मंच नहीं थी, बल्कि झारखंड जैसे संसाधन-समृद्ध लेकिन विकास से जूझते राज्य के लिए एक अवसर थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने योजनाओं, प्रस्तावों और जनहित के मुद्दों को मजबूती से रखा, जिससे केंद्र-राज्य संबंधों में नई समझ और सहयोग का द्वार खुल सकता है।

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