रांची | July 2025
झारखंड में टैक्स रिफंड के लिए फर्जी दान रसीद, बिल और बैंक स्टेटमेंट का इस्तेमाल करने वालों पर आयकर विभाग की राष्ट्रव्यापी कार्रवाई का दायरा अब बिहार की राजधानी पटना तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, रांची में हाल ही में की गई छापेमारी के दौरान मिले डिजिटल सबूतों और कागजी दस्तावेजों से इस गोरखधंधे के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
फर्जी दस्तावेज़ों पर टैक्स रिफंड: कौन-कौन हैं निशाने पर?
रांची में एक संदिग्ध अकाउंटेंट के आवास व कार्यालय पर छापेमारी के दौरान आयकर अधिकारियों को ऐसे प्रमाण मिले, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी बिल, दान रसीद और बैंक स्टेटमेंट बनाकर कई लोगों ने सेक्शन 80G और 80GGA के तहत टैक्स छूट का गलत लाभ उठाया है। इस व्यक्ति के पटना स्थित कई करदाताओं से भी वित्तीय संबंध पाए गए हैं।
पूछताछ और नोटिस जारी: शुरू हुई जांच
आयकर विभाग ने फर्जी टैक्स रिफंड लेने वालों की सूची तैयार कर ली है। विभाग द्वारा नोटिस भेजकर संदिग्धों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। शुरुआती पूछताछ में कुछ लोगों ने अनजाने में इसमें शामिल होने की बात स्वीकार की है, जबकि कई मामलों में साजिशन टैक्स चोरी का प्रयास सामने आया है।
कानूनी सजा: 200% पेनाल्टी और जेल का खतरा
जानकारों के अनुसार, फर्जी दावों के खिलाफ आयकर अधिनियम के तहत कठोर प्रावधान हैं। इस तरह के मामलों में आयकर विभाग 200% तक जुर्माना लगा सकता है। साथ ही, तीन साल से सात साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।
सेक्शन 80G और 80GGA का हो रहा दुरुपयोग
भारत सरकार द्वारा चैरिटेबल ट्रस्ट और ग्रामीण विकास से जुड़े संस्थानों को दान देने पर आयकर में छूट दी जाती है।
- सेक्शन 80G: मान्यता प्राप्त ट्रस्टों को दान देने पर 50% या 100% टैक्स कटौती।
- सेक्शन 80GGA: वैज्ञानिक शोध और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में दान के लिए अतिरिक्त छूट।
लेकिन जांच में सामने आया है कि कई लोग नकली संस्थाओं से फर्जी रसीद बनवाकर इस टैक्स छूट का लाभ उठाते रहे हैं।
निष्कर्ष
झारखंड में सामने आए इस फर्जी टैक्स रिफंड घोटाले ने कर चोरी की एक नई परत खोल दी है। आयकर विभाग की कार्रवाई अभी जारी है और आने वाले दिनों में और कई नाम सामने आ सकते हैं। आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह के टैक्स लाभ के लिए केवल मान्यता प्राप्त स्रोतों का ही उपयोग करें और किसी भी फर्जीवाड़े से दूर रहें।
