झारखंड-बिहार में निवेशकों से जुड़ा बड़ा खुलासा
झारखंड और बिहार में सहारा समूह की अचल संपत्तियों की बिक्री से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सीआईडी की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने सेबी की जानकारी के बिना कई ज़मीनें बेहद कम कीमतों पर बेच दीं। इन संपत्तियों से अर्जित धन को SEBI-Sahara रेगुलेटरी खाते में भी ट्रांसफर नहीं किया गया, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश की सीधी अवहेलना मानी जा रही है।
किन पर दर्ज हुई एफआईआर?
राज्य के आपराधिक अनुसंधान विभाग (CID) ने इस मामले में सहारा समूह के शीर्ष निदेशकों समेत दर्जनों लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि फर्जी कंपनियों और नामजद व्यक्तियों के माध्यम से यह लेन-देन किया गया, ताकि वास्तविक क्रय-विक्रय को छिपाया जा सके। इसमें धोखाधड़ी, साजिश और न्यायिक आदेश की अवहेलना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना
गौरतलब है कि 21 नवंबर 2013 को सर्वोच्च न्यायालय ने सहारा ग्रुप की सभी कंपनियों को चल-अचल संपत्ति बेचने पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद कंपनी ने बिना अनुमति जमीन बेच दी और उससे प्राप्त राशि भी नियमानुसार निवेशकों के फंड में नहीं डाली।
किन शहरों में बेची गई जमीन?
बोकारो (झारखंड):
बोकारो की 68.14 एकड़ जमीन, जिसकी वैल्यूएशन SEBI द्वारा अधिक कराई गई थी, उसे एक स्थानीय खरीदार को काफी कम दर पर बेच दिया गया। चास अंचल कार्यालय की जांच में भी यह ज़मीन सहारा के नाम दर्ज पाई गई।
धनबाद (झारखंड):
धनबाद के गोविंदपुर अंचल की जमीन पर अब असर्फी अस्पताल का निर्माण हो रहा है। जांच में पाया गया कि यह भूमि भी सहारा समूह की थी, जिसे गुपचुप तरीके से बेच दिया गया।
पटना (बिहार):
पटना की 65.28 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत सेबी ने 44.80 करोड़ आंकी थी, उसे केवल 2.52 करोड़ में बेच दिया गया। यह सौदा कई निजी कंपनियों के माध्यम से किया गया और वास्तविक मूल्य को जानबूझकर छिपाया गया।
बेगूसराय (बिहार):
बेगूसराय में दो अलग-अलग सौदों में कुल 32.16 एकड़ जमीन, जिसकी वैल्यू 44 करोड़ से अधिक थी, को मात्र 5.51 करोड़ में बेच दिया गया। यह कीमत न केवल बाजार दर से कम थी, बल्कि SEBI के 10 साल पुराने वैल्यूएशन से भी कम पाई गई।
निवेशकों को हुआ अरबों का नुकसान
झारखंड में सहारा के करीब 30,000 निवेशक हैं। अब तक लगभग 400 करोड़ रुपए के क्लेम दर्ज किए गए हैं। लेकिन अनुमान है कि 3600 करोड़ रुपए से अधिक की राशि अब भी क्लेम नहीं की गई है। इन निवेशकों के भविष्य को लेकर भारी आशंका बनी हुई है।
जांच की अगली दिशा
इस मामले की जांच के लिए डीजीपी के आदेश पर CID के डीएसपी स्तर के अधिकारी को जांच पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। अब संबंधित अंचल कार्यालयों से दस्तावेज़ जुटाए जा रहे हैं और जमीनों की वर्तमान स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।
निष्कर्ष
सहारा समूह के इस लेनदेन ने केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है, बल्कि लाखों निवेशकों के साथ विश्वासघात भी किया है। CID की यह कार्रवाई झारखंड और बिहार के उन आम लोगों के लिए राहत की किरण हो सकती है, जिनकी मेहनत की कमाई इस घोटाले में फंसी है। अब देखना होगा कि क्या इस मामले में आरोपियों पर कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस पाता है या फिर यह एक और अधूरी जांच बनकर रह जाती है।
