रांची
राजधानी रांची के ऐतिहासिक रातू किला परिसर स्थित जगन्नाथपुर मंदिर से शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज, धार्मिक उल्लास और भक्ति की उमड़ती भावना ने माहौल को अद्भुत बना दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए उमड़ पड़ा था।
नेत्रदान संस्कार के बाद हुए दर्शन
रथयात्रा की पूर्व संध्या पर गुरुवार को वैदिक विधि से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का नेत्रदान संस्कार संपन्न हुआ। मंदिर के प्रमुख पुरोहितों, जिनमें राजपुरोहित भोलानाथ मिश्र और करुणा मिश्र शामिल थे, ने यह अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद भगवान की महाआरती हुई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
सुबह से ही लगी रही लंबी कतारें
शुक्रवार की सुबह होते ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ने लगे। लंबी कतारें दिनभर लगी रहीं। हर कोई भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने को उत्सुक नजर आया। मंदिर प्रबंधन की ओर से सुबह 5 बजे ही मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था, ताकि भारी भीड़ के बावजूद दर्शन सुव्यवस्थित रह सकें।
राजपरिवार की देखरेख में निकली रथयात्रा
जगन्नाथ रथयात्रा को पारंपरिक रूप से राजपरिवार की महिलाएं – राजकुमारी माधुरी मंजरी देवी और कल्पना देवी – की देखरेख में निकाला जाता है। इस वर्ष भी उन्हीं की उपस्थिति में रथयात्रा शुरू हुई। रथ पर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के विग्रहों को विधिपूर्वक विराजित किया गया। रथ में मुख्य पुरोहित और राजपरिवार के सदस्य भी सवार रहे।
कड़ा सुरक्षा प्रबंध और CCTV निगरानी
रथयात्रा को लेकर पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। पूरे मंदिर परिसर, रथ मार्ग और मेला क्षेत्र में CCTV कैमरों के माध्यम से निगरानी की जा रही
