झारखंड में आम लोगों की जेब पर महंगाई का सीधा असर दिखने लगा है। बीते तीन महीनों में दैनिक उपयोग की चीजों के साथ-साथ हरी सब्जियों की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। FMCG कंपनियों ने साबुन, तेल, शैंपू, फेश वॉश और टूथपेस्ट जैसे रोज इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की कीमतों में 3% से 20% तक इजाफा किया है। इसके पीछे कच्चे माल, पैकेजिंग, और परिवहन लागत में वृद्धि जैसी वजहें बताई जा रही हैं।
FMCG उत्पादों में 10% तक औसत वृद्धि
मार्च से जून 2025 के बीच अधिकांश FMCG उत्पादों की कीमतों में औसतन 10% तक का इजाफा देखा गया है। उदाहरण के तौर पर, कोलगेट का 500 ग्राम पैक 135 रुपये से बढ़कर 149 रुपये हो गया है, वहीं 175 मि.ली. शैंपू की कीमत 149 से बढ़कर 179 रुपये पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई के पीछे कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती कीमतें, मानसून की देरी और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जिम्मेदार हैं।
सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल
राज्य में लगातार हो रही बारिश ने सब्जी उत्पादन को गहरा नुकसान पहुंचाया है। जलजमाव और फसलों के गलने के चलते हरी सब्जियों की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे कीमतें दोगुनी तक हो गई हैं।
- टमाटर: 20 से बढ़कर 60 रुपये किलो
- शिमला मिर्च: 70 से बढ़कर 120 रुपये किलो
- फूलगोभी: 30 से बढ़कर 80 रुपये किलो
- फ्रेंचबीन: 130 से बढ़कर 200 रुपये किलो
मांग में गिरावट, कारोबार प्रभावित
महंगी कीमतों के कारण बाजारों में खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ी है। रांची की सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि पहले जो सब्जी आसानी से बिक जाती थी, अब ग्राहक दाम सुनकर लौट जा रहे हैं। बारिश से बर्बाद हुई स्थानीय फसल के कारण अब सब्जियों की आपूर्ति बेंगलुरु, बिहार और बंगाल से की जा रही है, जिससे लागत और बढ़ गई है।
निष्कर्ष
महंगाई की यह लहर झारखंड के मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सीधा प्रभावित कर रही है। जहां एक ओर FMCG उत्पाद महंगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर सब्जियों की कीमतों ने भी घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है। यदि मानसून की स्थिति और आपूर्ति व्यवस्था जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
