रांची, झारखंड:

झारखंड में शराब खुदरा बिक्री प्रणाली में बड़ा घोटाला सामने आया है। झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) की आंतरिक अंकेक्षण रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पुरानी शराब नीति के दौरान काम कर रही सात प्लेसमेंट एजेंसियों ने राज्य सरकार को करीब ₹129.55 करोड़ का नुकसान पहुंचाया।

ऑडिट रिपोर्ट में क्या आया सामने

रिपोर्ट के अनुसार, इन एजेंसियों ने शराब बिक्री के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी कर राजस्व में भारी हेरफेर की।

  • इनमें से मेसर्स विज़न हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज से 3.31 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
  • जांच में यह भी सामने आया कि विज़न हॉस्पिटैलिटी और मार्शन इनोवेटिव ने 5-5 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा कराई थी।
  • चूंकि गारंटी जाली थी, विभाग इनके खिलाफ गारंटी ज़ब्त कर वसूली नहीं कर पा रहा है।

नई शराब नीति और निविदा प्रक्रिया

घोटाले के बाद सरकार ने नई शराब नीति लागू कर दी है।

  • शराब दुकानों के संचालन के लिए निविदा (टेंडर) जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
  • इच्छुक आवेदक उत्पाद विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा कर सकते हैं।
  • अंतिम तिथि 20 अगस्त रात 11:59 बजे तय की गई है।
  • पूरा प्रोसेस डिजिटल रखा गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

एजेंसियों का बचाव: कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला

शोकॉज नोटिस का जवाब देते हुए ज्यादातर एजेंसियों ने दावा किया कि वे मैनपावर का वेतन नहीं दे पाए, जिसकी वजह से सरकार को भुगतान प्रभावित हुआ।

  • राज्य के 19 जिलों में हैंडओवर-टेकओवर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
  • इन जिलों के सैंपल ऑडिट में बिक्री और जमा राशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया।
  • उत्पाद विभाग ने बकाया रकम की वसूली के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

राज्य पर असर

₹129 करोड़ रुपये का यह नुकसान राज्य के राजस्व पर सीधा असर डालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घोटाले न केवल सरकारी आय में कमी लाते हैं बल्कि नई शराब नीति की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करते हैं।

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