प्रकाशित: 7 जुलाई 2025 | The Mediawala Express डेस्क

रांची — झारखंड सरकार बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को लेकर बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों (कक्षा 1 से 8 तक) में हर सप्ताह एक दिन ऐसा होगा जब बच्चे बिना बैग के स्कूल जाएंगे।

इस दिन क्लासरूम में किताबों की पढ़ाई नहीं, बल्कि खेल, योग, आर्ट, संगीत और व्यावसायिक गतिविधियों पर फोकस किया जाएगा।

बैगलेस डे: बच्चों को फिर से जोड़ने की कोशिश ज़मीन से

राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को इस योजना को लेकर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। उनका मानना है कि

“मोबाइल और डिजिटल लाइफस्टाइल ने बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी से दूर कर दिया है। अब वक्त है कि उन्हें फिर से खेल-कूद, कला और जीवन-कौशल से जोड़ा जाए।”

दूसरे राज्यों से मिली प्रेरणा

  • गुजरात में हर शनिवार “नो स्कूल बैग डे” लागू किया गया है
  • उत्तराखंड में महीने के आखिरी शनिवार को बैगलेस डे चल रहा है
  • अब उसी तर्ज पर झारखंड में भी इसे लागू करने की तैयारी है

क्या-क्या होगा बैगलेस डे में?

राज्य स्तर पर फिजिकल एक्टीविटी कैलेंडर तैयार किया जाएगा, जिसमें हर शनिवार बच्चों की रुचि और उम्र के अनुसार गतिविधियां तय होंगी:

योग, प्राणायाम, व्यायाम

आर्ट और पेंटिंग

इंडोर और आउटडोर गेम्स

सांस्कृतिक कार्यक्रम

प्रोजेक्ट और वोकेशनल लर्निंग

वर्तमान में कैसे हो रही है बैगलेस पहल?

फिलहाल झारखंड के कुछ स्कूलों में वोकेशनल शिक्षा के तहत साल में 10 दिन “बैगलेस डे” होते हैं। इनमें मास्टर ट्रेनर छात्रों को व्यवसायिक ट्रेनिंग देते हैं।

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