रिपोर्ट: प्रियंशु झा | The Mediawala Express

दिनांक: 3 जुलाई 2025 | रांची

झारखंड की राजनीति उस वक्त गर्मा गई जब भोगनाडीह में हूल दिवस समारोह के दौरान हथियारों के साथ पकड़े गए संदिग्ध व्यक्तियों को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए।

JMM का दावा है कि यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हत्या की सुनियोजित साजिश हो सकती है, जिसका ताना-बाना दिल्ली से बुना गया। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बौखलाहट और राजनीतिक नौटंकी बताया।

JMM का आरोप: क्या सोची-समझी हत्या की साजिश थी?

JMM के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि भोगनाडीह में जिन लोगों को हथियारों के साथ पकड़ा गया, उनका संबंध पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन से जुड़ा हुआ है।

सुप्रियो का सवाल था – “ये लोग हथियार लेकर हूल दिवस के आयोजन में क्या करने आए थे? क्या उनका इरादा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों की हत्या का था?”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पूर्व-नियोजित साजिश थी और इसे दिल्ली के दीनदयाल मार्ग से संचालित किया गया, जिसमें गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, चंपाई सोरेन और मंडल मुर्मू जैसे नाम शामिल हैं।

“संताल को मणिपुर बनाना चाहती है भाजपा”: JMM

भट्टाचार्य ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह झारखंड के संताल परगना को मणिपुर जैसी हिंसाग्रस्त स्थिति में धकेलने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि झामुमो के जुझारू कार्यकर्ता भाजपा की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देंगे।

उनका यह भी दावा है कि पुलिस की प्राथमिक जांच में कुछ संदिग्ध नाम सामने आए हैं और गिरफ्तारियां शुरू हो चुकी हैं। जल्द ही पूरा सच जनता के सामने होगा।

BJP का पलटवार: JMM की बौखलाहट, तुष्टीकरण की राजनीति

इन आरोपों पर भाजपा की ओर से जोरदार प्रतिक्रिया आई। पार्टी के प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने झामुमो पर पलटवार करते हुए कहा कि JMM की जमीन संताल में खिसक रही है, इसलिए वह आरोपों का सहारा लेकर माहौल बिगाड़ना चाहती है।

साहू ने यह भी कहा कि JMM को अब शहीद सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू तक से खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब आदिवासी गौरव भी सत्ता की नजर में संदिग्ध हो गया है?

राजनीतिक टकराव या सुरक्षा संकट?

यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप की भाषा इतनी तीखी हुई हो। लेकिन इस बार मामला एक मुख्यमंत्री की जान को लेकर खतरे की आशंका से जुड़ा है, जिसे महज़ बयानबाज़ी कहकर टाला नहीं जा सकता।

भोगनाडीह, जहां झारखंड के स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक सिदो-कान्हू की स्मृति में हूल दिवस मनाया जाता है, वहां इस प्रकार की घटना का सामने आना, राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी गंभीर चुनौती है।

निष्कर्ष

JMM और BJP के बीच छिड़ा यह ताजा टकराव आने वाले समय में झारखंड की राजनीति को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकता है। अगर JMM के आरोपों में तथ्य हैं, तो यह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक शुचिता पर गहरा सवाल है। वहीं, यदि यह केवल राजनीतिक मंचन है, तो जनता का भरोसा खोने का जोखिम भी उतना ही बड़ा है।

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