रांची। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल में हुए आतंकी हमले और उसके बाद की राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के मद्देनज़र भारत सरकार ने अब देश के भीतर अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेषकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या समुदाय पर सख्ती शुरू कर दी है। इसी क्रम में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को निर्देश भेजते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य अपने-अपने जिलों में अवैध निवासियों की पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
गृह मंत्रालय का स्पष्ट आदेश – “पहचान कर डिपोर्ट करें”
2 मई को गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में झारखंड के मुख्य सचिव से कहा गया है कि सभी जिलों में अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान की जाए और उनके लिए “होल्डिंग सेंटर” की व्यवस्था की जाए। ये सेंटर ऐसे अस्थायी ठिकाने होंगे, जहां इन लोगों को दस्तावेज़ों के सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने तक रखा जाएगा।
जिलावार टास्क फोर्स का गठन अनिवार्य
पत्र में यह निर्देश भी दिया गया है कि राज्य सरकार जिला स्तर पर विशेष टास्क फोर्स गठित करे, जो पुलिस और खुफिया इकाइयों के समन्वय से यह सुनिश्चित करें कि अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों को चिन्हित किया जाए। इसके बाद उन्हें होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा, जहां सभी आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) या तटरक्षक बल (Coast Guard) को सौंपा जाएगा, ताकि उन्हें उनके देश वापस भेजा जा सके।
भारतीय नागरिक होने के दावे की गहन जांच
यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक होने का दावा करता है, तो उसकी पूरी जांच की जाएगी। इसके लिए संदिग्ध व्यक्ति का नाम, माता-पिता की जानकारी, पता, और नजदीकी रिश्तेदारों का विवरण लेकर उस राज्य को भेजा जाएगा जहां वह व्यक्ति नागरिकता का दावा कर रहा है। संबंधित राज्य को 30 दिनों के भीतर सत्यापन कर रिपोर्ट देनी होगी।
इस अवधि में व्यक्ति को डिपोर्ट न करते हुए होल्डिंग सेंटर में ही रखा जाएगा ताकि उसकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
राज्यों से समन्वय की भी मांग
गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति झारखंड में पाया गया और वह दावा करता है कि वह किसी अन्य राज्य का नागरिक है, तो झारखंड सरकार को उस राज्य की सरकार से सहयोग लेकर सत्यापन सुनिश्चित करना होगा। यह अंतरराज्यीय समन्वय पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगा।
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राज्य स्तर पर क्या है तैयारी?
सूत्रों के अनुसार, झारखंड के कई जिलों—खासकर सीमावर्ती और खनन क्षेत्रों में—अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की संख्या बीते वर्षों में बढ़ी है। यह देखा गया है कि ये लोग स्थानीय मजदूरी, घरेलू कार्य और छोटे व्यापारों में शामिल रहते हैं, जिससे पहचान कर पाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
राज्य सरकार अब जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षकों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश देने की तैयारी में है। संभावना है कि आगामी सप्ताहों में जिलावार डाटा संकलन, निगरानी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज़ की जाएगी।
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राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा कदम
यह कदम ऐसे समय पर आया है जब देशभर में आतंकी गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी है और सुरक्षा एजेंसियां विदेशी नागरिकों की मौजूदगी पर खास निगाह रख रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्देश न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है, बल्कि भारत की आव्रजन नीति को व्यवस्थित और कानूनी दायरे में लाने की भी पहल है।
