हजारीबाग | जुलाई 2025

झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित सीसीएल गिद्दी-ए कोलियरी परियोजना में कोयले के परिवहन और उठाव में अवैध उगाही के मामले में सीबीआई एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) रांची ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीसीएल के प्रबंधन से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस छापेमारी और पूछताछ ने कोयला ट्रांसपोर्ट से जुड़े भ्रष्टाचार के गहरे जाल को उजागर कर दिया है।

कौन-कौन गिरफ्तार हुए ?

CBI की रांची स्थित ACB टीम ने मंगलवार को जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया, वे इस प्रकार हैं:

  1. अयोध्या करमाली – प्रोजेक्ट ऑफिस मैनेजर
  2. मुकेश कुमार – क्लर्क
  3. प्रकाश महली – क्लर्क
  4. विजय कुमार सिंह – कोल लिफ्टर

गिरफ्तारी के बाद चारों को पूछताछ के लिए रांची स्थित सीबीआई कार्यालय लाया गया। पूछताछ के बाद उन्हें विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें होटवार जेल भेज दिया गया। अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित है।

कैसे होता था अवैध पैसा वसूली का खेल?

CBI द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रति ट्रक ₹1800 की दर से अवैध उगाही की जा रही थी।

  • हर माह लगभग ₹10 लाख तक की वसूली ट्रांसपोर्टरों और कोल लिफ्टरों से होती थी।
  • क्लर्क मुकेश और प्रकाश महली यह रकम प्रबंधक अयोध्या करमाली को पहुंचाते थे।

CBI की जांच में यह भी सामने आया कि:

  • मुकेश कुमार ने अयोध्या करमाली को ₹2.03 लाख का अवैध भुगतान किया।
  • प्रकाश महली को अलग-अलग कोल लिफ्टरों से ₹4.98 लाख ट्रांसफर हुए।

यह सारा ब्योरा अयोध्या करमाली के मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड से प्राप्त हुआ।

जांच और FIR की पृष्ठभूमि

  • 6 मार्च 2025 को CBI और CCL विजिलेंस की संयुक्त टीम ने गिद्दी-ए प्रोजेक्ट कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था।
  • प्रारंभिक पूछताछ में ही प्रबंधक ने वसूली की बात मानी थी।
  • 5 जून को सीबीआई ने FIR दर्ज की, जिसमें तीन लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया।
  • आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया।

क्या हैं आरोप?

  • लोक सेवकों द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त करना
  • निजी व्यक्तियों को कोयला उठाव और ट्रांसपोर्ट में मदद देने के बदले रिश्वत लेना
  • डिजिटल ट्रांजैक्शन और मोबाइल डेटा से साक्ष्य प्राप्त

निष्कर्ष:

झारखंड में कोयला क्षेत्र से जुड़े भ्रष्टाचार की परतें एक बार फिर उजागर हो रही हैं। सीबीआई की यह कार्रवाई न केवल कोयला परियोजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि राज्य में लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से अवैध वसूली का एक संगठित तंत्र चल रहा है। अब देखना यह होगा कि आगे की जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।

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