रांची

झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSMDC) में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए राहत की खबर आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें हटाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने बुधवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए प्रबंधन और आउटसोर्सिंग एजेंसी से जवाब भी मांगा है।

क्या है मामला?

इस मामले में प्रिया कुमारी समेत कई संविदा कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2017 और 2019 में लेखापाल जैसे पदों पर संविदा के आधार पर की गई थी। यह नियुक्ति रिक्त पदों के लिए जारी आधिकारिक विज्ञापन के तहत हुई थी। लेकिन हाल ही में जेएसएमडीसी द्वारा एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से नई भर्तियां की जा रही हैं, जिससे पूर्व से कार्यरत संविदा कर्मियों को हटाने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

अदालत की टिप्पणी

प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता रूपेश सिंह ने अदालत के समक्ष दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि पहले से संविदा पर कार्यरत कर्मियों को केवल इस आधार पर नहीं हटाया जा सकता कि अब आउटसोर्स के माध्यम से नई नियुक्ति की जा रही है। कोर्ट ने इस आधार पर याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि उन्हें सेवा से न हटाया जाए।

जेएसएमडीसी और आउटसोर्स एजेंसी से जवाब तलब

हाईकोर्ट ने JSMDC और संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट रूप से पूछा है कि पूर्व में संविदा पर नियुक्त कर्मियों को हटाकर नई नियुक्ति की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई है। कोर्ट ने 19 जून से की जा रही नई आउटसोर्स नियुक्तियों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

आगे की सुनवाई तक बनी रहेगी स्थिति

कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार, जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक याचिकाकर्ता अपनी सेवाएं जारी रखेंगे और उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। यह आदेश संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि अचानक सेवा समाप्त होने की आशंका खत्म हो गई है।

निष्कर्ष:

JSMDC में संविदा पर कार्यरत कर्मियों की नौकरी बचाने की लड़ाई को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत के इस आदेश से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि संविदा पर वर्षों से कार्यरत कर्मियों को उचित प्रक्रिया के बिना हटाया नहीं जा सकता। अब मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि संविदा नीति और आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में क्या संशोधन या हस्तक्षेप जरूरी है।

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