रांची। झारखंड में सड़क निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, गिरिडीह जिले में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दौरान विभागीय अधिकारियों और जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी के बीच तालमेल की कमी के कारण लगभग 19.15 करोड़ रुपये व्यर्थ खर्च कर दिए गए।

भूमि अधिग्रहण पर भारी चूक

कैग की रिपोर्ट बताती है कि कोडेम्ब्री-मंद्रो-अस्को रोड के 18.85 किमी हिस्से को चौड़ा करने की परियोजना 2011 में 29.94 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत हुई थी और 2012-13 तक पूरी होनी थी। इसके लिए 86.16 एकड़ भूमि का अधिग्रहण 20 गांवों में होना था।

लेकिन जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी को अतिरिक्त राशि समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई और अधिशासी अभियंता (RCD) तथा DLAO के बीच समन्वय की कमी ने परियोजना को भारी नुकसान पहुंचाया। नतीजा यह हुआ कि 19.15 करोड़ रुपये बिना उपयोग के बर्बाद हो गए।

वन्यजीव और पर्यावरण पर भी असर

रिपोर्ट का एक और गंभीर पहलू यह है कि 2017 से 2021 के बीच झारखंड के वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ गया।

  • वृक्षावरण (Green Cover) में 2.60% की कमी दर्ज की गई।
  • खाली भूमि और निर्माण क्षेत्रों में क्रमशः 13.51% और 22.33% की बढ़ोतरी हुई।
  • वन्यजीवों की संख्या 2017-18 में जहां 20,028 थी, वह 2019-20 में घटकर 12,104 रह गई। हालांकि 2020-21 में यह बढ़कर 19,882 पर पहुंची।

झारखंड के 11 वन्यजीव अभयारण्य और 1 राष्ट्रीय उद्यान में तेंदुआ, भेड़िया, भालू, हिरण, हाथी, सियार, चीतल, सांभर, जंगली सूअर और लकड़बग्घे जैसे जीव पाए जाते हैं। इसके अलावा पलामू टाइगर रिज़र्व और सिंहभूम हाथी अभयारण्य भी राज्य की धरोहर हैं।

सवालों के घेरे में सरकार

यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश होते ही विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर समय पर समन्वय होता तो करोड़ों की सार्वजनिक धनराशि की बर्बादी रोकी जा सकती थी।

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