रांची, 6 जुलाई 2025

झारखंड की सीआईडी ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची के जगन्नाथपुर इलाके में स्थित एक होटल से सात चीनी साइबर नेटवर्क से जुड़े एजेंटों को गिरफ्तार किया है। इन एजेंटों पर आरोप है कि वे भारत में सक्रिय चीनी साइबर अपराधियों के लिए फाइनेंशियल म्यूल नेटवर्क तैयार कर रहे थे, जिसके ज़रिए करोड़ों की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया जा रहा था।

गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी

सीआईडी के साइबर थाने को 4 जुलाई को गुप्त सूचना मिली थी कि एक स्थानीय होटल में कुछ लोग डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर संगठित साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। उसी के आधार पर शुक्रवार को होटल में छापेमारी कर एजेंटों को हिरासत में लिया गया। सीआईडी ने इस मामले में औपचारिक एफआईआर भी दर्ज कर ली है।

कैसे काम करता था चीनी ठगी नेटवर्क?

पूरे रैकेट का संचालन बेहद तकनीकी और सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था। गिरफ्तार एजेंट देशभर से फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) की व्यवस्था करते थे। इन खातों का इस्तेमाल चीनी साइबर ठग भारत में पैसों की हेराफेरी के लिए करते थे।

एक बार जब म्यूल अकाउंट्स की व्यवस्था हो जाती, तो ठग टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के ज़रिए एपीके (APK) फाइल भेजते थे, जिन्हें टारगेट के मोबाइल में इंस्टॉल कराया जाता था। ये फाइलें बैंक से जुड़े मोबाइल नंबरों में ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी को सीधे चीन स्थित सर्वर पर भेज देती थीं। इस प्रक्रिया से साइबर ठग उन खातों को रिमोट एक्सेस देकर करोड़ों की ठगी को अंजाम देते थे।

चीनी कंपनियों से लिंक

सीआईडी की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार एजेंट ‘मोनो पे’, ‘ड्रैगन पे’, ‘सुपर पे’ और ‘मैंगो पे इंडिया’ जैसी चीनी कंपनियों के लिए काम करते थे। ये कंपनियां अक्सर फर्जी इन्वेस्टमेंट ऐप्स या गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए लोगों को ठगने का जरिया बनती हैं।

देशभर में दर्ज हैं 68 शिकायतें

सीआईडी की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस गिरोह के खिलाफ पूरे देश में अब तक कुल 68 ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। गिरफ्तार एजेंटों के पास से 60 म्यूल बैंक खातों की विस्तृत जानकारी, 12 मोबाइल फोन, 14 एटीएम कार्ड, एक सिम और टेलीग्राम-व्हाट्सऐप चैटिंग के कई तकनीकी प्रमाण भी बरामद हुए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए सभी सात एजेंट बिहार और मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं:

  • कुमार दीपक (सीवान, बिहार)
  • कुमार सौरभ (नालंदा, बिहार)
  • प्रभात कुमार (सीवान, बिहार)
  • लखन चौरसिया (सागर, मध्यप्रदेश)
  • शिवम कुमार (नवादा, बिहार)
  • अनिल कुमार (पटना, बिहार)
  • प्रदीप कुमार (पटना, बिहार)

बड़ी सफलता, जांच जारी

सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क का हिस्सा है और इसकी जड़ें कई राज्यों और विदेशी साइबर गिरोहों तक फैली हुई हैं। एजेंसी अब डिजिटल डाटा एनालिसिस और फंड फ्लो की जांच में जुट गई है।

यह कार्रवाई झारखंड पुलिस और साइबर क्राइम जांच एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो न सिर्फ राज्य बल्कि देशभर में फैले साइबर अपराध तंत्र पर कड़ा प्रहार है।

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