रांची, 28 जून 2025 | The Mediawala Express

झारखंड में एकीकृत सचिवालय भवन के निर्माण को लेकर हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को 16वें वित्त आयोग के समक्ष 4366.62 करोड़ रुपये की अनुदान राशि की मांग रखी है, जिसमें से 2250 करोड़ रुपये केवल नए सचिवालय भवन के निर्माण के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। यह प्रस्ताव भवन निर्माण विभाग के माध्यम से तैयार कर सौंपा गया है।

सभी विभागों को एक छत के नीचे लाने की योजना

वर्तमान में झारखंड सचिवालय के कई विभाग अलग-अलग स्थानों पर फैले हुए हैं, जिससे समन्वय और कामकाज में परेशानी हो रही है। मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग होने के बावजूद उनके कार्यालय अलग-अलग परिसरों में हैं। एकीकृत सचिवालय भवन बन जाने से यह सभी विभाग एक ही परिसर में आ जाएंगे, जिससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी, बल्कि कर्मचारियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

कौन से विभाग कहां स्थित हैं?

उदाहरण के तौर पर, स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति और आपदा प्रबंधन जैसे विभाग अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे हैं — कोई नेपाल हाउस में है, तो कोई प्रोजेक्ट भवन या धुर्वा गोलचक्कर के पास। इसी तरह, राजस्व और परिवहन विभाग क्रमशः प्रोजेक्ट भवन और एफपीपी बिल्डिंग में स्थित हैं। वित्त और वाणिज्य कर विभाग प्रोजेक्ट भवन में है जबकि योजना और विकास विभाग नेपाल हाउस में कार्यरत है। नगर विकास और उच्च शिक्षा विभाग भी अलग-अलग परिसरों में हैं।

भवन निर्माण विभाग की अन्य मांगें भी शामिल

राज्य सरकार द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में भवन निर्माण विभाग की ओर से केवल सचिवालय भवन ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी ढांचागत योजनाओं के लिए भी केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की गई है। इनमें सार्वजनिक कार्यालयों के आधुनिकीकरण, प्रशासनिक भवनों की मरम्मत, और डिजिटलीकरण जैसे पहल भी शामिल हैं।

निष्कर्ष

हेमंत सोरेन सरकार का यह कदम न केवल प्रशासनिक कुशलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि राज्य अब केंद्रीय सहयोग के साथ अपनी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए सक्रिय हो गया है। अगर केंद्र से मांगी गई राशि को स्वीकृति मिलती है, तो आने वाले वर्षों में झारखंड का सचिवालय आधुनिकता और समन्वय का प्रतीक बन सकता है।

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