रांची, 6 जुलाई 2025

झारखंड की राजनीति एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता से गर्मा गई है। शुक्रवार को ईडी की कार्रवाई के बाद अब पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी पुत्री, बड़कागांव से पूर्व कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद से पूछताछ की तैयारी शुरू हो गई है। मनी लॉन्ड्रिंग और कथित अवैध वसूली के मामलों को लेकर एजेंसी की यह कार्रवाई राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई है।

मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, मोबाइल और डिजिटल साक्ष्य जब्त

प्रवर्तन निदेशालय की जांच का मुख्य बिंदु कोल माफिया से कथित उगाही, रंगदारी और अवैध गतिविधियों से प्राप्त राशि का कथित शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) है। जांच एजेंसी ने शुक्रवार की सुबह रांची और हजारीबाग में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए, जिनका डाटा संबंधित व्यक्तियों की उपस्थिति में रिट्रिव किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, ईडी ने जिन जगहों पर छापे मारे उनमें अंबा प्रसाद के करीबी सहयोगियों के आवास के साथ-साथ योगेंद्र साव के पुत्र अंकित राज के चार्टर्ड अकाउंटेंट बादल गोयल का ठिकाना भी शामिल है। वहां से करीब 15 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।

पूछताछ के लिए समन की तैयारी

ईडी अब जांच को अगले चरण में ले जाने की तैयारी में है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक साक्ष्यों और जब्त दस्तावेजों के आधार पर आने वाले सप्ताह में योगेंद्र साव, अंबा प्रसाद और अन्य संदिग्धों को समन भेजा जाएगा।

यह पहली बार नहीं है जब इन नेताओं से पूछताछ होने जा रही है। इससे पहले अप्रैल 2024 में भी ईडी ने इसी मामले में दोनों से पूछताछ की थी, लेकिन अब जांच की दिशा अधिक निर्णायक मानी जा रही है।

किन-किन ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई

इस व्यापक छापेमारी में ईडी की टीमें रांची के किशोरगंज स्थित आनंदनगर पहुंची जहां अंबा प्रसाद के सहयोगी पंचम कुमार का आवास है। वहीं हजारीबाग में बड़कागांव स्थित समाधान भवन, शिवाडीह इलाके में मनोज दांगी, मंटू सोनी (जो पहले योगेंद्र साव के करीबी पत्रकार माने जाते हैं), संजीत कुमार और मीनाक्षी फ्यूल के मालिक शशि प्रकाश सिंह के ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया।

राजनीतिक बयानबाज़ी तेज, भाजपा पर निशाना

ईडी की कार्रवाई के बाद पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंबा प्रसाद का राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता कद भाजपा को रास नहीं आ रहा है। बंगाल और बिहार की जिम्मेदारी मिलने के बाद से उन्हें लगातार केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से परेशान किया जा रहा है। योगेंद्र साव का कहना है कि यह कार्रवाई निष्पक्ष नहीं बल्कि राजनीतिक विद्वेष का परिणाम है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा के कई नेताओं के पास अपार संपत्ति और कारोबारी नेटवर्क है, तब उनकी जांच क्यों नहीं होती? उन्होंने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार देते हुए कहा कि इससे कांग्रेस डरने वाली नहीं है।

निष्कर्ष

ईडी की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति को और गर्मा सकती है। जहां एक ओर जांच एजेंसी अपनी प्रक्रिया को कानून के मुताबिक आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा प्रायोजित कार्रवाई बता रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पूछताछ के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यह मामला कानूनी स्तर पर कोई बड़ा मोड़ लेता है।

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