धनबाद (झारखंड): झारखंड के बाघमारा से भाजपा सांसद ढुलू महतो और उनके सहयोगियों को अदालत ने शनिवार को जानलेवा हमले के एक मामले में बरी कर दिया। एमपी-एमएलए मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश दुर्गेशचंद्र अवस्थी की कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया।
क्या था आरोप?
29 अप्रैल 2019 को डोमन महतो और उनके पिता कन्हाई महतो ने आरोप लगाया था कि वे अपनी निजी जमीन पर दुकान बना रहे थे, तभी ढुलू महतो अपने बॉडीगार्ड और समर्थकों के साथ वहां पहुंचे।
उन्होंने दुकान बनाने से मना करते हुए मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी। आरोप यह भी था कि डोमन की भाभी के साथ भी अभद्रता की गई और मोबाइल छीनकर फेंका गया।
FIR और अदालती कार्यवाही:
- पहली शिकायत: 29 अप्रैल 2019 को डोमन ने शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
- दूसरी शिकायत: 14 फरवरी 2020 को बरोरा थाने में पुनः लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई।
- नामजद आरोपी: ढुलू महतो, अजय गोराईं, कृष्णा रविदास उर्फ विनय रविदास, बूढ़ा राय और बिट्टू सिंह।
- अदालत की सुनवाई: गवाहों की गवाही अभियोजन पक्ष के समर्थन में नहीं आई, जिससे आरोप साबित नहीं हो सके।
कोर्ट का फैसला:
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अधिकांश गवाह अपने बयानों से मुकर गए, जिससे संदेह का लाभ सभी आरोपियों को मिला और उन्हें बरी कर दिया गया।
निष्कर्ष:
यह मामला झारखंड की राजनीति और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न जरूर खड़े करता है, लेकिन अदालत का फैसला गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर ही आता है। इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि अदालत में आरोपों को साबित करना सबसे अहम होता है।
