झारखंड की बोकारो विधानसभा सीट से कांग्रेस की वर्तमान विधायक पर एक बार फिर विवादों के बादल मंडरा रहे हैं। इस बार उन पर दो अलग-अलग पैन कार्ड और चार मतदाता पहचान पत्र रखने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में बोकारो की उपायुक्त ने प्रारंभिक स्तर पर जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) को सौंप दी है।

क्या हैं आरोप?

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, विधायक ने नामांकन के समय अपने शपथ पत्र में सभी तथ्यों का उल्लेख नहीं किया। आरोप है कि उनके पास दो पैन नंबर हैं—एक पैन कार्ड रामगढ़ से जबकि दूसरा गुड़गांव से जारी हुआ है। दोनों का उपयोग विभिन्न समयों पर किया गया, जिसकी जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी गई।

इसके अतिरिक्त, विधायक पर चार मतदाता पहचान पत्र रखने का भी आरोप है, जो विभिन्न क्षेत्रों से जारी बताए जा रहे हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि बोकारो स्टील सिटी स्थित सरकारी आवास में उनके नाम से करीब 45 हजार रुपये किराया बकाया है, जिसे उन्होंने अपने शपथ पत्र में उजागर नहीं किया।

राज्यपाल तक पहुंचा मामला

यह मामला अब राज्य स्तर पर भी गूंजने लगा है। पूर्व विधायक बिरंची नारायण समेत कई राजनीतिक प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को पत्र सौंपकर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि अगर कोई जनप्रतिनिधि शपथ पत्र में तथ्यों को छुपाता है या गलत जानकारी देता है, तो यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

विधायक ने दी प्रतिक्रिया

सभी आरोपों को खारिज करते हुए विधायक ने कहा कि यह राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उनका कहना है कि विकास के मुद्दों पर बात करने की बजाय कुछ विरोधी नेता व्यक्तिगत हमलों पर उतर आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच से सारी सच्चाई सामने आ जाएगी और वह किसी भी जांच से डरती नहीं हैं।

प्रशासनिक स्तर पर क्या हो रहा है?

बोकारो की उपायुक्त ने सभी दस्तावेजों की प्राथमिक जांच कराने के बाद विस्तृत रिपोर्ट राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेज दी है। अब इस मामले पर अगला कदम निर्वाचन आयोग द्वारा उठाया जाएगा। आयोग द्वारा रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यह तय किया जाएगा कि इस मामले में विस्तृत जांच की आवश्यकता है या नहीं।

निष्कर्ष

बोकारो विधायक पर लगे दस्तावेजी गड़बड़ियों के आरोप राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। एक ओर विपक्ष इसे नैतिकता और पारदर्शिता से जोड़कर मुद्दा बना रहा है, तो वहीं विधायक इसे पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बता रही हैं। अब सबकी नजरें निर्वाचन आयोग और राज्य प्रशासन के आगामी कदमों पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, कानूनी मोड़ भी ले सकता है।

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